प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में पहले चरण की काउंसलिंग रविवार को समाप्त हो गई।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह के आदेश के बाद भी डायट प्राचार्यों ने खूब मनमानी की।
स्थिति यह रही कि स्नातक में 45 फीसदी अंक वालों को कहीं काउंसलिंग में शामिल किया गया तो कहीं लौटा दिया गया।
छोटी-छोटी जानकारी के लिए अभ्यर्थियों को भटकना पड़ा। गैर जरूरी कागजात के लिए इतना दौड़ाया गया कि उनके पसीने छूट गए।
डायट पर हुई जमकर अनदेखी
एससीईआरटी ने 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती के लिए पहले चरण में तीन दिन 29, 30 व 31 अगस्त को काउंसलिंग कार्यक्रम तय किया था।
एससीईआरटी ने जो कार्यक्रम जारी किया था उससे अभ्यर्थियों को काउंसलिंग में किसी तरह की दिक्कतें न आती, लेकिन डायट प्राचार्यों ने या तो इससे जुड़े आदेश को पढ़ा नहीं या फिर उसकी अनदेखी कर दी।
एससीईआरटी से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि 27 सितंबर 2011 को जारी शासनादेश संख्या 3176 में दी गई व्यवस्था के आधार पर आवेदकों को पात्र मानते हुए काउंसलिंग की जाएगी।
इसके बाद भी डायट प्राचार्यों ने इसका पालन नहीं किया। स्थिति यह रही कि कई जिलों में 45 फीसदी अंकों में स्नातक उत्तीर्ण करने वालों को काउंसलिंग में शामिल किया गया तो कई जिलों में ऐसे अभ्यर्थियों को वापस कर दिया गया।
एससीईआरटी के घेराव की तैयारी
डायट प्राचार्यों की मनमानी के खिलाफ 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक के अभ्यर्थी एससीईआरटी का घेराव करने की तैयारी में हैं।
हरेंद्र मौर्या, शशि भूषण आदि कुछ अभ्यर्थियों ने कहा है कि 27 सितंबर 2011 को जारी शासनादेश में स्पष्ट व्यवस्था दी गई है कि 45 फीसदी अंक में स्नातक पास वाले शिक्षक भर्ती के पात्र होंगे।
इसके बाद भी डायट प्राचार्य मनमानी पर उतारू हैं। इससे तो बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मंशा साफ नहीं लग रही है।
सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए। इसके बाद भी अधिकारी इसे लटकाने पर उतारू हैं। इसलिए अभ्यर्थी जल्द ही एससीईआरटी का घेराव करेंगे।