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फिर बसपा की अध्यक्ष चुनी गईं मायावती

Sun, 31 Aug 2014 08:53 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
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पूर्व मुख्यमंत्री मायावती एक बार फिर बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन ली गईं। वह 2001 से ही पार्टी की कमान संभाले हुए हैं। मायावती ने इस मौके पर देश भर के पार्टी पदाधिकारियों को विश्वास दिलाया कि नई उम्मीद व नई ऊर्जा के साथ वह पार्टी के मिशन को मंजिल तक  पहुंचाने के लिए पूरी ताकत लगा देंगी।
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शनिवार को बसपा सुप्रीमो के माल एवेन्यू स्थित आवास के सभागार में पार्टी की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति के पदाधिकारियों व सदस्यों, ऑल इंडिया स्टेट कमेटी के वरिष्ठ पदाधिकारियों व देश भर से चयनित प्रतिनिधियों का सम्मेलन हुआ।

पहले ही दिए गए थे बड़े पद

सम्मेलन में राज्यसभा सदस्य अम्बेथ राजन के निर्देशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की कार्यवाही पूरी हुई। पार्टी के करीब 21 राज्यों के अध्यक्षों ने मायावती को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने का प्रस्ताव किया जिसका महासचिवों व उपाध्यक्षों ने समर्थन किया।

इसके बाद राजन ने मायावती को सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की घोषणा की। मायावती को बसपा संस्थापक कांशीराम ने स्वयं के अध्यक्ष रहने के दौरान पहले महासचिव, फिर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था।

15 दिसंबर 2001 को कांशीराम ने मायावती को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए उन्हें पार्टी की कमान सौंप दी थी। वह तभी से बसपा का नेतृत्व कर रही हैं।

किये जा सकते हैं बड़े बदलाव

मायावती के सर्वसम्मति से अध्यक्ष निर्वाचित होने की घोषणा होते ही वहां मौजूद राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र, स्वामी प्रसाद मौर्य व नसीमुद्दीन सिद्दीकी, प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर, पूर्व वित्त मंत्री जुगुल किशोर, सांसद बृजेश पाठक व पूर्व मंत्री आरके चौधरी सहित बड़ी संख्या में नेताओं व पदाधिकारियों ने उन्हें माला पहनाकर बधाई दी।

बसपा प्रमुख ने पदाधिकारियों व प्रतिनिधियों का आभार जताया और पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए पूरी ताकत से जुटने का आह्वान किया।

मायावती ने अध्यक्ष चुने जाने के तुरंत बाद राज्यवार अलग-अलग पार्टी संगठन के कार्यों की समीक्षा शुरू कर दी। इसमें कई राष्ट्रीय पदाधिकारी भी शामिल हैं।
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प्रदेश में 'घोषणा' सरकार

मायावती ने आरोप लगाया कि  प्रदेश सरकार न तो विकास कर पा रही है और न ही कानून-व्यवस्था पर कोई नियंत्रण रह गया है।

यह सरकार अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए जल्दी-जल्दी कैबिनेट की बैठक कर उसका खूब प्रचार करवाती है। पर, जब उसे अमल में लाने का मौका आता है तो फेल साबित होती है।
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