सपा के वरिष्ठ पार्षद व पूर्व नेता सपा पार्षद दल यावर हुसैन रेशू का आरोप है कि निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए शासन ने जीआईएस सर्वे कराया। यही बात कांग्रेस की वरिष्ठ पार्षद व पूर्व नेता कांग्रेस पार्षद दल ममता चौधरी भी कहती हैं। दोनों का कहना है कि जब नगर निगम के पास खुद टैक्स इंस्पेक्टर हैं, तो फिर क्यों 10 करोड़ रुपये सर्वे पर खर्च किए गए? दोनों कहते हैं, सदन में यह मामला उठाया गया था। ऐेसे में अफसरों को नए सदन का इंतजार करना चाहिए था। जब मामला सदन का था, तो फिर सदन में ही इस पर बात होनी चाहिए थी।
भाजपा पार्षद ने भी उठाए सवाल
भाजपा पार्षद व पूर्व उपनेता भाजपा पार्षद दल कौशलेंद्र द्विवेदी कहते हैं, पिछले सदन में भी मैंने मामला उठाया था। निजी कंपनी का सर्वे गलत है। सर्वे करने वालों ने गड़बड़ी की। सीधे सर्वे के आधार पर टैक्स नहीं बढ़ाना चाहिए था। पहले नगर निगम के टैक्स इंस्पेक्टर से सत्यापन कराया जाए, उसके बाद ही टैक्स फीड किया जाए।
आपत्ति करें, गड़बड़ी दूर की जाएगी
नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अशोक सिंह का कहना है कि यदि किसी को यह लगता है कि सर्वे के बाद उसका टैक्स निर्धारण गलत हुआ है, तो वह संबंधित जोन में जोनल अफसर, कर अधीक्षक और राजस्व निरीक्षक के पास जाकर आपत्ति दर्ज करा सकता है। जांच कर उसे दुरुस्त किया जाएगा। यदि जोनल स्तर पर सुनवाई नहीं हो, तो मुख्यालय आकर मुझसे मिल सकते हैं। शिकायत का निस्तारण किया जाएगा।