मुलायम परिवार में सियासी संकट दो साल से चल रहा है लेकिन ये ऐन चुनाव के पहले इस तरह सड़क पर आ जाएगा इसकी शायद ही किसी ने उम्मीद की हो।
हाल में ताजा संकट की शुरुआत कौमी एकता दल के सपा में विलय से शुरू हुई थी। मुलायम और शिवपाल ने मिलकर
बाहुबली मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के सपा में विलय कराया था। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की खुली नाराजगी के बाद सपा को विलय रद्द करना पड़ा था। बाद में मुख्यमंत्री और शिवपाल के बीच शह-मात का खेल सीधे शुरू हो गया। जो अखिलेश को सपा के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने और शिवपाल से मंत्रिमंडल के महत्वपूर्ण महकमे छीनने तक पहुंच गया।
मंगलवार को सुबह से देर रात के बीच सपा और सरकार के स्तर पर जिस तरह से घटनाक्रम सामने आए उससे सत्ता संघर्ष चरम पर पहुंच गया है, संकेत है कि शिवपाल बुधवार को अखिलेश मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे सकते हैं। तेजी से घट रहे सियासी घटनाक्रम को लेकर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
पहले दो मंत्री बर्खास्त किए फिर सिंघल को हटाया
सीएम अखिलेश यादव
सोमवार को ही अखिलेश यादव ने अपने दो मंत्री- गायत्री प्रसाद प्रजापति और राज किशोर सिंह को हटाया था। प्रजापति को मुलायम सिंह यादव का करीबी माना जाता है।
इसके बाद मंगलवार को अखिलेश ने मुख्य सचिव दीपक सिंघल को हटाकर उनकी जगह राहुल भटगर को जिम्मेदारी सौंपी। सिंघल को इस पद पर रहते हुए दो महीने ही हुए थे। दीपक सिंघल को शिवपाल यादव का करीबी माना जाता है।
मंगलवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्य सचिव दीपक सिंघल को हटाकर उनकी जगह राहुल भट्नागर को जिम्मेदारी सौंपी। दीपक सिंघल को शिवपाल यादव का करीबी माना जाता है।
मुलायम ने अखिलेश से छीना प्रदेश अध्यक्ष पद
यूपी में सियासी भूचाल
- फोटो : amar ujala
इसके बाद देर शाम खबर आई कि अखिलेश यादव को पार्टी प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर शिवपाल यादव को कमान सौंपी गई। इस घटनाक्रम के बाद खबर आई कि अखिलेश ने कैबिनेट में फेरबदल कर शिवपाल यादव से कई अहम मंत्रालय छीन लिए।
शिवपाल के पास परती भूमि और समाज कल्याण जैसे मामूली महकमे ही रह गए हैं। अब तक शिवपाल सिंचाई पीडब्लूडी, सहकारिता और रेवेन्यू जैसे भारी भरकम महकमों के कर्ताधर्ता हुआ करते थे। इनके हिस्से पूरी यूपी के बजट का 30 फीसदी हिस्सा आता था।
सभी महत्वपूर्ण विभाग वापस लेने के बाद कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव इस्तीफा दे सकते हैं।