इसके अलावा कुछ मंत्रियों के कामकाज को लेकर नेतृत्व के पास शिकायतें पहुंची हैं। इनमें कुछ के विभागों में फेरबदल होगा तो कुछ को नई भूमिका सौंपी जा सकती है। अच्छा काम करने वाले कुछ स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्रियों को तरक्की देकर कैबिनेट मंत्री तो कुछ राज्य मंत्रियों को स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया जाना है। कुछ मंत्रियों की सांगठनिक क्षमता देखते हुए उन्हें सरकार से संगठन में भेजने का निश्चय किया जा चुका है।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि ये सरकार में उतने प्रभावशाली तरीके से काम नहीं कर पा रहे हैं जितने प्रभावी तरीके से संगठन में काम करते थे। कुछ विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के संगठन में अच्छा काम देखते हुए उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल कर इनाम देने की तैयारी की है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय के केंद्र सरकार का हिस्सा बन जाने के कारण दोनों ही जगह नए अध्यक्ष बनाए जाने हैं। प्रदेश संगठन के अन्य कुछ पदाधिकारियों को भी बोर्डों और आयोगों में अध्यक्ष बनाया जा चुका है। भाजपा के संविधान के मुताबिक, एक व्यक्ति एक ही पद पर रह सकता है।
जाहिर है कि इनके स्थान पर भी नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की जानी है। ऐसे में भाजपा के रणनीतिकार चाहते हैं कि संगठन और सरकार में एक साथ फेरबदल कर लिया जाए ताकि बार-बार बदलाव न करने पड़ें।
सूत्रों के अनुसार, शाह भले ही केंद्र सरकार का हिस्सा बन गए हों लेकिन इन सारे फैसलों में उनकी राय काफी अहम रहेगी। इसलिए भी कुछ वक्त लग रहा है। इस बार प्र्रदेश में भाजपा संगठन और सरकार में होने वाले बदलाव बहुत महत्वपूर्ण हो गए हैं। इसकी एक वजह विधानसभा का आगामी चुनाव भी है। कारण, इस बार जिसे भी प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा या जो लोग संगठन की टीम में आएंगे उन्हीं नेतृत्व में विधानसभा का अगला चुनाव लड़ा जाना है। जो जनवरी से मार्च 2022 के बीच होगा।