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सोते रहे डॉक्टर, शौचालय में प्रसव के बाद प्रसूता बेहोश, नवजात की मौत

Mon, 18 Apr 2016 10:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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अस्पताल में भर्ती आश‌िया - फोटो : Amar Ujala
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राजधानी के एक बड़े सरकारी अस्पताल डफरिन में भर्ती प्रसूता आशिया दर्द से कराह रही थी। नाइट ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और नर्स सो रही थीं। परिवारीजनों ने प्रसूता की बढ़ती तकलीफ देख स्टाफ और डॉक्टर को सूचित भी किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 
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शनिवार को देर रात दो बजे के करीब शौचालय में ही उसे प्रसव हो गया। काफी देर तक जब वह बाहर नहीं आई तो परिवारीजनों ने शौचालय में जाकर देखा, जहां आशिया बेहोश थी और नवजात वहीं जमीन पर पड़ा था। इसके बाद तो जैसे चीख-पुकार मच गई। 

इसके बावजूद वार्ड में नाइट ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स और डॉक्टर देखने नहीं आई। हंगामा बढ़ा तो एक नर्स मौके पह पहुंची और नवजात को मृत बताया और प्रसूता की हालत सामान्य बताकर सोने चली गई। 
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अन्य मरीजों के तीमारदार जच्चा-बच्चा को वार्ड में ले गए। सआदतगंज निवासी आशिया (28) को प्रसव पीड़ा के बाद शुक्रवार दोपहर में गोलागंज स्थित वीरांगना अवंती बाई बाल महिला (डफरिन) चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। 

मां परवीन का आरोप है कि दर्द के बावजूद आधा-अधूरा इलाज मिला। शनिवार शाम को दिक्कत हुई तो डॉक्टर ने बताया कि सोमवार को अल्ट्रासाउंड जांच कराई जाएगी। रात नौ बजे के करीब दर्द बढ़ गया। डॉक्टर को बताया तो स्टाफ नर्स ने एक इंजेक्शन लगा दिया, लेकिन रात करीब डेढ़ बजे प्रसव पीड़ा तेज होने लगी। 
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सुबह होने दो, हमें सोने दो

मां के साथ आश‌िया - फोटो : Amar Ujala
मां परवीन का आरोप है कि आशिया को दर्द बढ़ा तो ड्यूटी रूम में नर्स को सूचित करने गए, लेकिन वहां कोई नहीं मिला। गार्ड को बताया तो उसने कहा कि अभी डॉक्टर साहब और नर्स सो रही हैं। सुबह होने दो तब इलाज मिलेगा और मुझे भी सोने दो। । 

मां परवीन का कहना है कि नर्स से डॉक्टर को बुलाने के लिए कहा तो उसने कहा कि अब जो होना था वह हो गया। अब डॉक्टर आकर क्या करेंगी। इस बात से नाराज परिवारीजनों ने हंगामा किया तो डॉक्टरों और नर्सो ने प्रसूता का रविवार दोपहर तक इलाज बंद कर दिया। 

विरोध और शिकायत करने की बात कहने पर इलाज शुरू हुआ। परिवारीजनों का आरोप था कि समय पर सही इलाज मिल गया होता तो शौचालय में प्रसव की नौबत नहीं आती और नवजात की जान नहीं जाती। 

शौचालय में प्रसव के आधे घंटे बाद पहुंची स्टाफ नर्स और सफाई कर्मचारी ने शौचालय को साफ करने के लिए 200 रुपये मांगे। मां परवीन ने बताया कि पैसा देने से मना कर दिया तो नर्स और वार्ड ब्वॉय ने कहा कि शौचालय साफ करो, नहीं रात को अस्पताल से भगा दिए जाओगे। 

बेबस और लाचार परिवारीजन पैसा न दे सके तो मां परवीन और भाभी साफिया ने शौचालय साफ किया। परिवारीजनों का आरोप था कि अस्पताल में इलाज में लापरवाही होने के साथ स्टाफ नर्स और कर्मचारी तक मनमानी कर रहे हैं। 
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