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कुछ ऐसे होता है पेट्रोल में 'खेल'

Sat, 14 Dec 2013 10:09 AM IST
ज्ञान सक्सेना/लखनऊ
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आप लाख मीटर पर नजर गड़ाए रहें, लेकिन पेट्रोल पंप पर घटतौली हो ही जाती है।
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पेट्रोलियम कंपनियों के गुणवत्ता युक्त तेल दिलाने के तमाम दावों के बावजूद पेट्रोल पंप संचालक उपभोक्ताओं को चूना लगाने का कोई मौका नहीं छोड़ते।

घटतौली के ‘खेल’ को रोकने के लिए पंपों को हाईटेक बनाने के दावे कागजी साबित हो रहे हैं। पंप का रीडिंग मीटर तो सही रकम व पेट्रोल की मात्रा दिखाता है लेकिन गाड़ी चलाने पर हकीकत सामने आ जाती है।
कुछ पेट्रोल पंपों पर संचालकों के इशारे पर डिलीवरी मैन कम पेट्रोल देकर अपनी जेब भरते हैं। इसके लिए डिस्पेंसर यूनिट के नोजल में जेड लाइन पर डबल गियर सिस्टम लगाया जाता है।
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इससे मीटर में पेट्रोल पूरा दिखता है लेकिन गाड़ी में कम आता है। इस तरह प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल के वितरण में तीस से पचास मिमी तक का चूना आराम से लगाया जाता है।
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वहीं कुछ पंपों पर डिलीवरी मैन झटके से पेट्रोल डालकर ग्राहक को चूना लगाते है। कई जगह डिलीवरी मैन मीटर ऑफ किए बिना पुरानी रीडिंग पर ही नए कस्टमर को पेट्रोल नाप देते हैं।

मसलन किसी ग्राहक ने एक लीटर पेट्रोल भरवाया। इतने में पहुंचे दूसरे कस्टमर ने तीन लीटर पेट्रोल भरवाने को कहा।

ऐसे में मशीन को जीरो पर किए जाने का भ्रम पैदा कर पुरानी रीडिंग पर ही सप्लाई देकर ग्राहक को तगड़ा झटका दिया जाता है।

वहीं ग्रामीण इलाकों में संचालित पंप पर बिजली की आवाजाही के कारण मैनुअल मशीनों में आसानी से छेड़खानी की जा रही है।
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