दिवाली के अवसर पर राज्य सरकार ने मधुमक्खी पालकों को बड़ी राहत दी है।
अब पंजीकृत मौन पालकों के प्रदेश के अंदर या उसके बाहर मधुमक्खी के बॉक्स, शहद और अन्य उत्पाद लाने-ले जाने पर कोई पाबंदी नहीं होगी।
कृषि उत्पादन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने इस बाबत शासनादेश जारी कर दिया है।
इस शासनादेश में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने किसानों की आय को दोगुना करने के लिए मधुमक्खी पालन को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के तौर पर चिह्नित किया है।
एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत किसानों को अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
देश के विभिन्न क्षेत्रों में जलवायु और फसल प्रणाली अलग-अलग होने के कारम मौनपालकों को मधुमक्खी के बॉक्स एक स्थान से दूसरे स्थान और कभी-कभी एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में ले जाना पड़ता है।
मधुमक्खियों को शहद, नेक्टर और पराग की उपलब्धता प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कराने के लिए ऐसा करना जरूरी है।
शासनादेश में यह भी कहा गया है कि जिले और प्रदेश की सीमाओं पर चेकिंग के दौरान बक्सों को ले जाने वाली गाड़ियों को रोके जाने, उन्हें चोरी का बताने और शहद को वन उपज मानते हुए उसके परिवहन पर रोक लगाने जैसी घटनाएं सामने रही हैं।
इन कठिनाइयों को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को जरूरी निर्देश जारी करने के लिए कहा है।
एपीसी की ओर से जारी शासनादेश में कहा गया है कि नेशनल बी बोर्ड, खादी ग्रामोद्योग, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग या अन्य किसी राजकीय संस्था या विभाग में पंजीकृत मौन पालकों को मधुमक्खी के बॉक्स प्रदेश के अंदर या बाहर परिवहन करने और रखे जाने पर किसी तरह की कोई रोक न लगाई जाए।
मौन पालकों को हर तरह का सहयोग दिया जाए, ताकि उनकी आय दोगुनी हो सके।