सूबे के बीएड कॉलेजों में दाखिले के लिए 22 अप्रैल को आयोजित संयुक्त प्रवेश परीक्षा का परिणाम शुक्रवार को जारी कर दिया गया। इसमें झांसी के अंकित कुमार ने 400 में 316.67 अंक के साथ पहला स्थान हासिल किया।
फैजाबाद की प्रीति पांडेय 309 अंकों के साथ महिला वर्ग की टॉपर बनी। ओवरऑल प्रीति को पांचवां स्थान मिला। लखनऊ से अंकित तिवारी ने 302 अंकों के साथ 15वां स्थान हासिल कर सिटी टॉप किया।
इस साल परीक्षा में 2,64,470 अभ्यर्थी बैठे। जिसमें से 1268 ने सिर्फ एक पाली की परीक्षा दी और तीन को नकल करने के चलते परीक्षा से बाहर कर दिया गया। लिहाजा कुल मिलाकर 2,63,199 अभ्यर्थियों का परीक्षा परिणाम घोषित किया गया।
अभ्यर्थी अपना परीक्षा परिणाम www.upbed.nic.in वेबसाइट पर देख सकते हैं। इस साल बीएड प्रवेश का जिम्मा लखनऊ विश्वविद्यालय के पास है।
बीएड टॉपर्स लिस्ट
महिला वर्ग में टॉपर प्रीती पांडेय
- फोटो : amar ujala
नाम--रैंक--अंक--शहर
अंकित कुमार--1--316.67--झांसी
लवकुश कुमार--2--312--इलाहाबाद
रामकृत चौहान--3--312--इलाहाबाद
सौरभ सिंह--4--310--इलाहाबाद
प्रीति पांडेय--5--309--फैजाबाद
अखंड प्रताप मिश्रा--6--309--वाराणसी
प्रभाकर चौबे--7--308.67--इलाहाबाद
मनीष पांडेय--8--306.66--इलाहाबाद
कमलेश कुमार--9--304.66--इलाहाबाद
सौरभ कुमार श्रीवास्तव--10--304--गाजियाबाद
(नोट : सभी की रैंक वेटेज सहित है।)
छह जून से होगी काउंसलिंग
बीएड के प्रवेश समन्वयक प्रो. वाईके शर्मा ने बताया काउंसलिंग छह जून से संभावित है। इसके लिए 30 मई से अभ्यर्थियों को काउंसलिंग कार्ड भेजा जाने लगेगा। 25 जून तक काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी होगी, जबकि प्रवेश की अंतिम तिथि 28 जून रखी गई है। बीएड का नया सत्र एक जुलाई से शुरू होगा।
परीक्षा के सह समन्वयक प्रो. पवन अग्रवाल ने बताया कि काउंसलिंग के लिए 14 शहरों में 32 केंद्र बनाए गए हैं, जो लखनऊ आगरा, अलीगढ़, आजमगढ़, जौनपुर, झांसी, मेरठ, गाजियाबाद, कानपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, फैजाबाद, बरेली और गोरखपुर में होगी। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में उपलब्ध सीटों का ब्योरा जल्द जारी किया जाएगा।
बढ़े एक लाख से अधिक अभ्यर्थी
इस साल बीएड क्वालिफाई करने वालों की संख्या में 1,00,635 अभ्यर्थियों का इजाफा हुआ है। 2015 में कुल 1,62,564 अभ्यर्थियों का रिजल्ट घोषित किया गया था। अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ने से इस बार कॉलेजों को काफी राहत मिलेगी। गत वर्ष कम अभ्यर्थी होने से कॉलेजों में भारी संख्या में सीटें खाली रह गई थीं।