कोई भी व्यक्ति खुद उच्च शिक्षा लेकर समाज को नहीं बदल सकता है। बल्कि अपनी शिक्षा केजरिए समाज को शिक्षित करने की सोच से सामाजिक बदलाव लाया जा सकता है। इसी सोच के आधार पर बाल श्रमिकों की जिंदगी सुधारने में जुटे हैं नरेंद्र। वे बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं और महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के काम में लगे हैं।
लखनऊ के फैजुल्लागंज निवासी नरेंद्र कुमार बताते हैं कि सामाजिक दायित्यों के निर्वहन की लगन इस कदर लगी कि लखनऊ विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग से एमफिल किया और अब बाल श्रमिकों को शिक्षित करने में लगे हैं। लखनऊ विवि के नेशनल चाइल्ड लेबर स्कूल में प्रशिक्षक कार्य कर रहे हैं।
सुबह और शाम अलग से अलग-अलग बस्तियों में क्लास लगाते हैं, जहां गरीब बस्ती केबच्चों को निशुल्क कोचिंग देते हैं। नरेंद्र कुमार बताते हैं कि यह लगन इंटरमीडिएट की पढ़ाई केदौरान ही लग गई थी। पहले अकेले इस अभियान में जुटे थे। बाद में मोहल्ले और आसपास के मोहल्ले केचार-पांच अन्य लोग साथ जुटे।
इस बीच अक्षय विकास सेवा समिति के साथ बाल श्रम रोकने के लिए अभियान चलाया। दुकानों पर जाकर लोगों को समझाया कि उनका बच्चा यदि पढ़ाई छोड़कर अभी से काम पर लग जाए तो कैसा लगेगा? इसका काफी असर भी रहा। इस बीच सरकारी तंत्र सक्रिय हुआ और बाल श्रमिकों को नेशनल चाइल्ड लेबर स्कूल में दाखिला कराया गया।