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बाल श्रमिकों को शिक्षित कर बेहतर नागरिक बनाने में जुटे नरेंद्र कुमार, महिलाओं को बनाया स्वावलंबी

Thu, 28 Mar 2019 03:22 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
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नरेंद्र कुमार - फोटो : amar ujala
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कोई भी व्यक्ति खुद उच्च शिक्षा लेकर समाज को नहीं बदल सकता है। बल्कि अपनी शिक्षा केजरिए समाज को शिक्षित करने की सोच से सामाजिक बदलाव लाया जा सकता है। इसी सोच के आधार पर बाल श्रमिकों की जिंदगी सुधारने में जुटे हैं नरेंद्र। वे बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं और महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के काम में लगे हैं।
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लखनऊ के फैजुल्लागंज निवासी नरेंद्र कुमार बताते हैं कि सामाजिक दायित्यों के निर्वहन की लगन इस कदर लगी कि लखनऊ विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग से एमफिल किया और अब बाल श्रमिकों को शिक्षित करने में लगे हैं। लखनऊ विवि के नेशनल चाइल्ड लेबर स्कूल में प्रशिक्षक कार्य कर रहे हैं।

सुबह और शाम अलग से अलग-अलग बस्तियों में क्लास लगाते हैं, जहां गरीब बस्ती केबच्चों को निशुल्क कोचिंग देते हैं। नरेंद्र कुमार बताते हैं कि यह लगन इंटरमीडिएट की पढ़ाई केदौरान ही लग गई थी। पहले अकेले इस अभियान में जुटे थे। बाद में मोहल्ले और आसपास के मोहल्ले केचार-पांच अन्य लोग साथ जुटे।
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इस बीच अक्षय विकास सेवा समिति के साथ बाल श्रम रोकने के लिए अभियान चलाया। दुकानों पर जाकर लोगों को समझाया कि उनका बच्चा यदि पढ़ाई छोड़कर अभी से काम पर लग जाए तो कैसा लगेगा? इसका काफी असर भी रहा। इस बीच सरकारी तंत्र सक्रिय हुआ और बाल श्रमिकों को नेशनल चाइल्ड लेबर स्कूल में दाखिला कराया गया।
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महिलाएं ग्रुप बनाकर कर रही हैं काम

महिलाओं को बनाया स्वावलंबी
इसी बीच झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की रणनीति तय की गई। इसके तहत उन्हें सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया गया। फिर रेडीमेट कंपनियां चलाने वालों से संपर्क कर उन्हें रोजगार दिलाया गया।

करीब 80 महिलाएं ऐसी हैं, जो कंपनियों से कच्चे माल के रूप में कपड़ा ले आती हैं और उन्हें निर्धारित डिजाइन के अनुसार तैयार करके लौटाती हैं। बदले में इतना मेहनताना मिल जाता है कि उनकी गृहस्थी चल सके। प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकीं कई महिलाएं खुद ही अपने आसपास के लोगों को काम सिखा रही हैं। अब इस तरह की एक चेन बन गई हैं। मलिन बस्तियों की महिलाएं आपसी ग्रुप बनाकर भी काम कर रही हैं।

पौधरोपण के लिए किया जागरुक
शहरीकरण की वजह से प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। इस पर नियंत्रण के लिए पौधरोपण बेहद जरूरी था। मोहल्ले केलोगों के साथ मिलकर विभिन्न पार्कों में पौधरोपण कराया। नरेंद्र बताते हैं कि उन्होंने अपने अभियान में बालिका शिक्षा को प्रमुखता दी है।

गरीब इलाके के लोग बच्चियों को उच्च शिक्षा दिलाने से कतराते हैं। लोगों को समझाया जाता है। उनके समूह ने दर्जनभर बच्चियों की पढ़ाई का खर्चा चंदा कर उठा रखा है। अब ये बच्चियां लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ रही हैं। प्रतियोगी परीक्षाएं भी दे रही हैं। जिस दिन ये सफल हो जाएंगी, उसी दिन सालों की मेहनत सार्थक मानी जाएगी।
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