सुमित श्रीवास्तव, वैज्ञानिक अधिकारी यूपीसीएसटी
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खगोलीय घटनाओं को लेकर लखनऊ में जागरूकता फैलाने के लिए 11 साल से सुमित श्रीवास्तव मुहिम चला रहे हैं। उनकी खुद की उम्र 29 है। यानी, 18 साल से वह इस अभियान से जुड़े हैं। 2007 में यूपी एमेच्योर एस्टॉनॉमर्स क्लब बनाकर शुरू हुई मुहिम में जहां वह स्कूलों में जाते हैं।
वहीं इंदिरागांधी नक्षत्रशाला की मदद से पुराने लखनऊ जैसे घने इलाके में भी दूरदर्शी लगाकर लोगों को मंगल गृह के पृथ्वी के पास से गुजरने की खगोलीय घटनाएं दिखाते हैं। ब्लड मून, सुपरमून, उल्का वर्षा, ग्रहों का पारगमन की खगोलीय घटनाओं को दिखाने से लेकर वह अपनी टीम के साथ सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण के पीछे के वैज्ञानिक तथ्यों को भी लोगों के बीच पहुंचाने का काम करते हैं।
उनका कहना है कि चांद, तारों और अंतरिक्ष से जुड़ी चीजों के बारे में जानने की बच्चों के मन में हमेशा ही जिज्ञासा रहती है। तारे रात में कहां से आते हैं और सुबह होते ही कहां गुम हो जाते हैं। चंद्रमा कैसे छोटा बड़ा होता रहता है। आकाशगंगा क्या है? कौन किसकी परिक्रमा करता है।
मैं और मेरी टीम ऐसे ही तमाम सवालों के बारे में जानकारी देकर बच्चों को जागरूक करते हैं। 2017 में मुझे यूपी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूपीसीएसटी) से वैज्ञानिक अधिकारी के रूप में जुड़ने का मौका मिला। लेकिन, खगोलीय घटनाओं के लिए लोगों और खास तौर पर बच्चों को वैज्ञानिक सोच के साथ जागरूक करने का सफर अब भी मेरा जारी है।