वहां भी संगत पौध प्रेमियों से ही हुई। फिर लखनऊ आकर उच्च न्यायालय में वकालत शुरू कर दी। वकालत के साथ ही पौधरोपण अभियान को भी बढ़ाते रहे। वकालत के साथ लोगों को पौधरोपण के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
वह बताते हैं कि यदि कोई मुवक्किल किसी दिन रुपये नहीं होने की बात करता है तो उसे यही सीख देते हैं कि उन रुपयों से घर में पौधे लगा लेना। वह दोबारा आता है तो पौधे का हालचाल पूछते हैं। किस मुवक्किल से कितने पौधे लगवाएं हैं, इसका भी बाकायदा डायरी में हिसाब रखते हैं। यह आंकड़ा करीब ढाई हजार से ऊपर पहुंच गया है।
डॉ. सिंह के पौध प्रेम का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह किसी के घर जाते हैं तो एक पौधा ले जाना नहीं भूलते हैं। शादी-विवाह से लेकर जन्मदिन पार्टी में भी अन्य उपहार के साथ एक पौधे का उपहार जरूर साथ रखते हैं।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ. सिंह करीब 26 बार रक्तदान कर चुके हैं। विभिन्न संगठनों की ओर से होने वाले रक्तदान शिविर में हिस्सा लेते हैं और खुद को उदाहरण के रूप में पेश करते हुए दूसरों से अपील करते हैं कि रक्तदान से किसी तरह की कमजोरी नहीं आती है।
इसलिए हर व्यक्ति को रक्तदान करना चाहिए। कर्मयोगी सेवा समिति, सुल्तानपुर फाउंडेशन सहित विभिन्न संस्थाओँ के जरिये रक्तदान शिविर का हर साल आयोजन करते हैं। इसी तरह गरीब बच्चों और निराश्रितों को वस्त्र व कंबल वितरण में भी लगे हैं।
डॉ. सिंह बताते हैं कि राजधानी के पार्कोँ में पौधे लगवा रहे हैं। अब तक करीब 10 हजार पौधे लगवा चुके हैं। यह शुरुआत अकेले किए थे, लेकिन अब उनके साथ करीब दर्जनभर लोगों की टीम है। टीम का सदस्य जहां भी जाता है, लोगों को पौधे लगाने की सीख देते हैं। अलीगंज के विभिन्न पार्कों के अलावा गोमती तट, बैकुंठधाम आदि स्थानों पर भी पौधे लगवाएं हैं। बाकायदा इन पौधों की देखरेख के लिए भी वक्त निकालते हैं।