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छांगुर का भंडाफोड़: कट्टर मौलानाओं से था संपर्क, हिंदू देवी देवताओं के खिलाफ तैयार की जा रहीं थी किताबें

Mon, 14 Jul 2025 09:31 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर

सार

छांगुर बाबा अपने गुर्गों को धर्मांतरण कराने में दक्ष बनाने के लिए तैयारी कर रहा था। इसके लिए उसने कट्टर मौलानाओं से भी संपर्क साधा था।
 
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जमालुद्दीन उर्फ छांगुर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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अवैध धर्मांतरण के सरगना जमालुद्दीन उर्फ छांगुर अपने गुर्गों को प्रशिक्षण देने की तैयारी कर रहा था। दो कोठी का निर्माण कराया था, जिसमें तहखाने की तरह कक्ष बनाए गए थे। प्रदेश के कट्टर नामी मौलानाओं से संपर्क भी साधा था। जिनसे गुर्गों को धर्म परिवर्तन कराने के तौर तरीके में दक्ष बनाने की योजना बनाई थी। 20 कक्षों में आने वाले दिनों में नियमित तकरीर आदि कराने की तैयारी कर रखी थी।

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छांगुर ने हिंदू श्रमिकों और गरीब परिवार के लोगों को पैसे का लालच देकर धर्म परिवर्तन करने की मुहिम का तगड़ा जाल बुना था। शिजर- ए- तयब्बा किताब भी इसी उद्देश्य से लिखी गई थी, जिससे लोग आसानी से इस्लाम को समझ सकें और दुनिया के सबसे बड़े धर्म के रूप में मान सकें। हिंदू देवी- देवताओं के प्रति कैसे घृणा भरी जाए और वेशभूषा कैसी हो, इसकी समझ को विकसित करने की तैयारी की थी। मधपुर में कोठी का निर्माण वर्ष 2022 में शुरू हुआ था, अभी निर्माण पूरी तरह हो नहीं सका था। कोठी का निर्माण कराने वाले वसीउद्दीन ने बताया कि कोठी को अभी अलग नहीं कराया था। पिलर पर भी पूरी कोठी खड़ी की गई थी, जिससे छांगुर अपने हिसाब से कमरों में बांट सके।

उन्होंने बताया कि निर्माण के समय ही उन्हें आभास हो गया था कि कुछ गलत कार्य के लिए ही कोठी बनाई जा रही है। लेकिन छांगुर ने उन्हें बताया था कि वह विद्यालय खोलना चाहता था, फिर कहा कि अस्पताल भी खोलेगा। इस तरह व झूठ ही बोलता रहा, अब वह कोठी तो गिर गई है लेकिन अभी भी कुछ भाग शेष रह गया है। इस तरह छांगुर की नीयत साफ नहीं थी, उसकी कोठी में एक साथ 200 लोगों को प्रतिदिन प्रशिक्षण दिए जाने की व्यवस्था थी।
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कौन था छांगुर का आका, एक फोन पर बदल देता था प्लान

छांगुर के पीछे किसी बड़े मास्टर माइंड का हाथ भी था, इसका दावा उसके करीब रहने वाले लोग ही करते हैं। कोई बाहर से फोन आता था, जिससे मिलने वाले हुक्म का पालन तत्काल बाबा करता था। वह निर्देशों का पालन करने में तनिक भी देर नहीं लगाता था। वह व्यक्ति कौन है, इसका राज छांगुर की कीपैड वाली मोाबाइल में छुपी है।
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छांगुर कभी भी एंड्रायड मोबाइल नहीं प्रयोग करता था

छांगुर कभी भी एंड्रायड मोबाइल का प्रयोग नहीं करता था, पुरानी छोटी मोबाइल ही रखता था। वह फोन को देखता भी नहीं था, बस आवाज सुनकर ही जान जाता था कि किसका फोन है। बाहर से आने वाले का फोन नंबर छांगुर को जुबानी याद रहता था। सामान्य स्थिति में भी आका का फोन आने पर उसके चेहरे की रंगत बदल जाती थी। हुक्म..हुक्म... और तामील- तामील से ज्यादा वह बोलता भी नहीं था। इससे लोग जान भी नहीं पाते थे कि दूसरी तरफ से क्या कहा गया।

इसके बाद केवल वह हुक्म जारी था कि यह होना ही चाहिए। कोठी के निर्माण में ही ऊपर से फोन पर तत्काल परिवर्तन करने का फरमान छांगुर जारी करता था। एक महीने में 36 बार उसने कोठी के निर्माण की स्थिति में परिवर्तन कराया। इससे लागत भी बढ़ती गई और बाद में ठेकेदार से विवाद की स्थिति बनी है।
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