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बहराइच हिंसा: हाईकोर्ट ने दी राहत, 23 अक्तूबर के पहले नहीं चल सकेगा बुलडोजर, मानने होंगे सुप्रीम कोर्ट के नियम

Mon, 21 Oct 2024 06:35 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

बहराइच हिंसा के आरोपियों के घर चलने वाला बुलडोजर 23 अक्तूबर तक नहीं चल सकेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इस पर रोक लगा दी है। 
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बहराइच हिंसा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बहराइच हिंसा के आरोपियों के अवैध निर्माण को ढहाने की कार्रवाई फिलहाल रुक गई है। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में मामला पहुंचने पर कोर्ट ने राज्य सरकार से 23 अक्तूबर को जानकारी पेश करने का आदेश दिया है। साथ ही जिन कथित अवैध निर्माणकर्ताओं को नोटिसें जारी की गई हैं, उन्हें भी इनका जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय देकर अफसरों को इनका निस्तारण करने का आदेश दिया है।

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न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने यह आदेश एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स संस्था के पूर्वी उप्र के उपाध्यक्ष के जरिए दाखिल जनहित याचिका पर दिया। याचिका में बहराइच के कथित अवैध निर्माणकर्ताओं को 17 अक्तूबर को जारी ध्वस्तीकरण की नोटिसों को चुनौती देकर इन्हें रद्द करने का आग्रह किया गया है। याचिका में कहा गया कि सरकारी अमला समुदाय विशेष के लोगों के निर्माणों को अवैध बताकर ढहाने की कर्रवाई कर रहा है, जबकि वहां पर सड़कों आदि पर कोई अतिक्रमण नहीं किया गया है।

उधर, राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने याचिका का विरोध कर आपत्ति उठाई कि अतिक्रमण कर बने निर्माणों को लेकर नोटिसें जारी की गई हैं। नोटिसों को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने सरकारी वकील को यह आपत्तियां लिखित रूप में दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया।
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कोर्ट ने कहा कि निर्माणों के ध्वस्तीकरण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही बीते 17 सितंबर को संज्ञान लेकर आदेश दिया है। ऐसे में हम यह विश्वास करने का कोई कारण नहीं पाते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरी तत्परता से पालन नहीं करेगी। कोर्ट ने कहा इस मामले में जिनको नोटिसें जारी हुई हैं, उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए महज तीन दिन का वक्त दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि तीन दिन का समय काफी कम है। नोटिसों में जगह का ब्योरा भी स्पष्ट नहीं है। कोर्ट ने इनकों जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया।

सरकार बताए सड़क की श्रेणी क्या है
इसके बाद कोर्ट ने कहा इस स्तर पर मामले की मेरिट पर कोई टिप्पणी किए बगैर हम मुख्य स्थायी अधिवक्ता को तीन दिन का समय मामले की पूरी जानकारी सरकार से लेने के लिए को देते हैं कि सड़क की श्रेणी क्या है। इस पर लागू होने वाले मानक अगली सुनवाई पर स्पष्ट किए जा सकते हैं। इस टिप्पणी व आदेश के साथ कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 23 अक्तूबर को नियत की है।

डर में बीता पूरा दिन 
 महसी तहसील के महराजगंज कस्बे में रविवार को पूरा दिन बुलडोजर कार्रवाई के डर में बीता। दिन भर लोग बुलडोजर चलने की आशंका में सहमे रहे हालांकि प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई। शनिवार को लोग जहां खुद दुकान व मकान तोड़ते दिखे थे तो वहीं रविवार को भी यह सिलसिला जारी रहा।

विगत 13 अक्तूबर को दुर्गापूजा के दौरान पत्थरबाजी व रामगोपाल मिश्रा हत्याकांड की घटना के बाद से महराजगंज कस्बे में सन्नाटा अभी भी पसरा है। मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद सहित 23 लोगों के घरों पर ध्वस्तीकरण का नोटिस चस्पा किया गया था जिसके बाद से कस्बे में हड़कंप की स्थित है। हालांकि बीते दो दिनों में कुछ परिस्थितियां बदली हैं और लोगों की दुकानें खुलने लगी हैं। रविवार को महराजगंज कस्बे की मुख्य बाजार में कई दुकानें बंद रही। वहीं यही हाल कस्बे के अंदर गलियों में स्थित बाजार का भी रहा।
 
 

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महराजगंज कस्बा छोड़ आसपास के बाजार में बढ़ी हलचल

बहराइच पहुंचा भारी मात्रा में पुलिस बल। - फोटो : अमर उजाला।
महराजगंज की घटना के बाद रमपुरवा, खैरीघाट, राजीचौराहा, भगवानपुर चौराह आदि बाजारें भी प्रभावित हुई थीं। लेकिन अब यहां स्थिति लगभग सामान्य हो गई है। रविवार को सभी बजारों में रौनक बढ़ी दिखी। लोगों की भीड़ बजार में उमड़ी और लोगों ने सामान्य दिनों की भांति ही खरीदारी की। साथ ही चाय की टपरियों व होटलों पर भी रौनक रही।

प्रशासन पर पक्षपात का भी लग रहा आरोप
अतिक्रमण की बात कहकर लोक निर्माण विभाग ने कस्बे के 23 घरों पर नोटिस चस्पा किया है। इसको लेकर पक्षपात के भी आरोप लगा रहे हैं। कस्बा निवासी मोहम्मद शकील ने आरोप लगाया कि सिर्फ 23 लोगों के घर पर नोटिस चस्पा किया गया है जबकि महाराजगंज कस्बे में ही सौ से अधिक मकान ऐसे बने हुए हैं, जो पीडब्ल्यूडी विभाग के मानक के विरुद्ध हैं।पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता अनुपम कुमार ने बताया कि मुख्य बिंदु से 60 फीट एक तरफ और 60 फीट एक तरफ सड़क क्षेत्र में है। कुल 120 फीट के अंदर के जो भी निर्माण हैं, अवैध हैं।
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