उन्होंने कहा, इस्माइल फारूकी मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि अयोध्या मामले की सुनवाई तथ्यों के आधार पर होगी न कि आस्था के। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान कोई मायने नहीं रखते क्योंकि कुंभ में पीएम मोदी कह चुके हैं कि अयोध्या मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी। अगर पीएम बयान से मुकर कर अध्यादेश लाते हैं तो उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
मध्यस्थता कमेटी की कोशिश के सवाल पर उन्होंने कहा कि मध्यस्थता कमेटी अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी जिस पर सर्वोच्च अदालत ही फैसला करेगी। इस मामले में मुसलमानों के सभी मसलकों का मानना है कि जिस जमीन पर एक बार मस्जिद बन गई वो हमेशा मस्जिद रहती है। हालांकि सर्वोच्च अदालत जो भी फैसला सुनाएगी उसे माना जाएगा।
बैठक में जीलानी ने सदस्यों को अयोध्या मामले की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया। कहा, 16 अगस्त या उसके बाद सुप्रमी कोर्ट में सुनवाई की तारीख तय होने की उम्मीद है। कमेटी का मानना है कि इस मामले में किसी तरह की जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए क्योंकि सुनवाई में तमाम दस्तावेजी सुबूत और कई बिंदुओं पर चर्चा होनी है।
कहा, सभी पक्षकारों को बहस का पूरा मौका मिलना चाहिए। बैठक में हिमासुद्दीन सिद्दीकी, अरशद जमाल, इलियास आजमी, मुश्ताक अहमद सिद्दीकी, मो. कमर आलम, अबरार अहमद और अय्यूब उल्लाह खां समेत तमाम सदस्य शामिल हुए।