प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री मो. आजम खां ने कहा कि मीडिया मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ितों और गरीब मुसलमानों पर रहम करे।
उन्हें अपनी टीआरपी बढ़ाने का जरिया न बनाए। विदेश दौरे से मंगलवार को लौटे आजम यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
इस दौरान उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कुछ मीडिया ग्रुप गुजरात दंगों के सूत्रधार नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने को माहौल बनाने के लिए हमारे पीछे पड़ गए।
इसीलिए मंत्रियों व विधायकों के राष्ट्रमंडल देशों के स्टडी टूर को अनावश्यक तूल दिया गया। आजम ने कहा कि मीडिया नेताओं और राजनीतिक व्यवस्था के प्रति नफरत पैदा कर अराजकता का माहौल बनाना चाहता है।
आपसी विरोध और अपने राजनीतिक फायदे के लिए अनेक राजनीतिक दल भी इस साजिश का हिस्सा बन रहे हैं। मीडिया को आजादी के नाम पर आतंक फैलाने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए।
राजनीतिक दलों को सोचना होगा कि वे देश के संविधान के अनुसार चलेंगे या फिर कुछ मीडिया ग्रुप और उनके बनाए एजेंडे पर।
संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि उनके नेतृत्व में राष्ट्रमंडल देशों की यात्रा पर गए विधायकों और मंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल को लेकर मीडिया ने इस तरह का माहौल बनाया।
एक मीडिया हाउस ने राजनीतिक दलों से इस दौरे पर प्रतिक्रिया दिलवाने में यहां तक कह डाला, ‘नेताओं के कंठ को क्या लकवा मार गया है।
गोया जनता से चुने हुए इन नुमाइंदों ने देश के साथ बहुत बड़ा अपराध कर डाला है। आजम ने कहा कि वे पहली बार इस तरह के दौरे पर नहीं गए थे।
पहले भी कई बार इस तरह के दौरों पर लोग जा चुके हैं। केशरीनाथ त्रिपाठी जब विधानसभा अध्यक्ष थे तब तो लगभग हर साल इस तरह के दौरे होते थे, पर इस बार मीडिया से यह मालूम हुआ कि ऐसे दौरे अपराध हैं।
कपड़े उतारने की हद तक चला गया मीडिया
आजम ने कहा कि मीडिया प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के कपड़े उतारने की हद तक चला गया। भूल गया कि प्रतिनिधिमंडल में महिला प्रतिनिधि भी हैं।
इसलिए कम से कम ‘अय्याशी’ जैसे शब्द न लिखे जाएं। जिस तरह की खबरें दिखाई और छापी गईं, उसके बाद तो ये लग रहा है कि क्यों न हमारा देश राष्ट्रमंडल और संयुक्त राष्ट्र संघ से अपनी सदस्यता वापस ले ले।
ऐसा बर्ताव जैसे हम देशद्रोही हों : आजम ने कहा कि नेताओं को जिस प्रकार 24 घंटे निगरानी में रखकर और उनकी हर छोटी-बड़ी बात को तोड़-मरोड़ कर सस्ती टीआरपी बटोरी जा रही है।
राजनेताओं को देश की सभी समस्याओं का कारण बताया जा रहा है। विदेश में हमारे प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का जिस तरह पीछा किया गया।
उससे कई बार मन में यह सवाल उठा कि प्रतिनिधिमंडल के सदस्य जनता द्वारा चुने जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि देशद्र्रोही हो।
पीड़ितों की मदद के अलावा और भी कई काम हैं
मो. आजम खां ने कहा कि जो लोग इस दौरे की आलोचना कर रहे हैं, उन्हें मुजफ्फरनगर में गरीब मुसलमानों के लिए किए गए एक-दो काम भी बता देना चाहिए।
दिखाया गया कि आजम को विदेश जाने की फुरसत मिल गई लेकिन मुजफ्फरनगर जाने की नहीं। इस पर इतना ही कहूंगा कि मुजफ्फरनगर मामले पर सर्वोच्च न्यायालय की तरफ से सात नोटिस मिल चुके हैं।
मुजफ्फरनगर तो मीडिया के इस डर से नहीं गया कि बिना गए आजम को दंगे का मुख्य षड्यंत्रकारी प्रचारित कर दिया गया तो जाने पर न जाने कौन सी कहानी बन जाए।
वैसे मुजफ्फरनगर के एक-एक गरीब मुसलमान के दिल में आजम हैं और आजम के दिल में ये गरीब मुसलमान। उत्तर प्रदेश 21 करोड़ की आबादी वाला राज्य है। इसलिए एक साथ कई काम होते रहेंगे।
पीड़ितों की पीड़ा दूर करने का भी काम होगा और संसदीय परंपराएं समझने और अन्य कामों से विदेश यात्राएं भी होंगी। सिर्फ एक काम को लेकर नहीं बैठा जा सकता।