मौलाना जौहर अली विश्वविद्यालय के निर्माण में आठ सरकारी विभागों का बजट खर्च किया गया था। आयकर विभाग की जांच में जौहर विश्वविद्यालय में अवस्थापना संबंधी कार्यों में इन विभागों का करीब 150 करोड़ रुपये खर्च किये जाने के सुराग मिले हैं। इसकी विस्तृत जांच के लिए विभागों को नोटिस भेजकर दस्तावेज देने के लिए नोडल अधिकारी तैनात करने को कहा गया है।
सूत्रों के मुताबिक आयकर विभाग की जांच में सामने आया है कि जौहर विश्वविद्यालय में सीएंडडीएस, लोक निर्माण विभाग, संस्कृति विभाग, ग्राम्य विभाग विभाग, पिछड़ा वर्ग विभाग, नगर विकास और सिंचाई विभाग द्वारा अवस्थापना संबंधी कार्य कराए गये थे। वहीं, जल निगम का दो अलग-अलग मदों में बजट खर्च किया गया था। इस बजट को पुल, सड़क, रिवरफ्रंट, नहर को चौड़ा करने, इमारतों के निर्माण समेत तमाम निर्माण कार्यों में व्यय किया गया था।
सूत्रों के मुताबिक सीएंडडीएस का 35.90 करोड़ रुपये स्वीकृत हुआ था, जिसमें से 20.99 करोड़ रुपये व्यय हुए थे। इसी तरह लोक निर्माण विभाग के 17.16 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, जबकि 13.73 करोड़ रुपये व्यय हुए। जल निगम के परियोजना प्रबंधक अस्थाई निर्माण इकाई के 46.86 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए, जबकि 46.86 करोड़ व्यय हुए। जल निगम अधिशासी अभियंता को 6.70 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, जिसे पूरा खर्च किया गया। चार अन्य विभागों द्वारा खर्च किये बजट के बारे में आयकर विभाग ने जानकारी मांगी है।
विधायक से हुई पूछताछ
आयकर विभाग ने आजम खां के करीबी रामपुर की चमरौआ सीट से सपा विधायक नसीर खां से पूछताछ की है। बता दें कि नसीर खां जौहर ट्रस्ट में संयुक्त सचिव भी हैं। बीते दिनों आजम के साथ उनके ठिकानों को भी तीन दिन तक आयकर विभाग ने खंगाला था। सूत्रों के मुताबिक नसीर खां से जौहर ट्रस्ट में हुए लेन-देन और उनके चुनावी हलफनामे को लेकर सवाल किए गये। करीब छह घंटे तक चली पूछताछ में वह लगातार अधिकारियों को गुमराह करते रहे और उन्होंने किसी भी सवाल का सही जवाब नहीं दिया है। जल्द ही उनको दोबारा नोटिस देकर तलब किया जाएगा।