अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. आजम खां ने एक बार फिर मुसलमानों को मोदी का डर दिखाया।
उन्होंने कहा कि यदि आपस में बंटोगे तो देश फांसीवादी ताकतों के हाथ में चला जाएगा।
उन्होंने कहा कि जाने-अनजाने यह गलती मत करना वरना बहुत पछताओगे।
एक बार पहले भी गलती की थी जिसके कारण छह दिसंबर 1992 की घटना हुई। एक लम्हे की गलती की सजा सदियों तक हम पा रहे हैं।
आजम खां गुरुवार को लोहिया पार्क में दिल्ली से लखनऊ पहुंची साइकिल यात्रा के समापन कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर का दर्द महसूस नहीं किया गया। बल्कि राजनैतिक दलों ने इस पर खूब सियासी रोटियां सेंकी हैं।
मुसलमानों की मदद नहीं बल्कि उन्हें जलील किया गया है। खुद मुख्यमंत्री ने दंगा पीड़ितों की मदद में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी।
आजम ने दंगा पीड़ितों से अपील की है कि वे अपनी बस्तियों में लौट जाएं। युवाओं से कहा कि वे यह यकीन दिलाएं कि अब कोई भी गुजरात से यहां आकर तुम्हारी बस्ती नहीं जला पाएगा।
उन्होंने कहा कि हम देश की आबादी का पांचवां हिस्सा हैं लेकिन आज भी हमें शक की निगाह से देखा जाता है।
हमारी सच्चाई व वतन दोस्ती पर उंगली उठती है। हमारे इसी दर्द का इलाज तब होगा जब नेताजी दिल्ली में प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठ जाएंगे।
मुलायम नहीं एएमयू के माथे कलंक
आजम खां का कहना है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने मुलायम सिंह का विरोध नहीं बल्कि एएमयू के माथे पर एक कलंक लगाया है। इससे नेताजी की छवि पर कोई असर नहीं पड़ता।