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पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, बेटियों को जूडो-कराटे सिखाओ

Fri, 07 Mar 2014 10:36 AM IST
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ
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..आज समय है बेटियों को ताकतवर बनाने का। इसके लिए उन्हें बचपन से ही जूडो कराटे सिखाओ...।
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लड़कियों को आत्मरक्षा के लिए ताकतवर बनाने की यह सीख बृहस्पतिवार को पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने दी।

वे विश्व महिला दिवस के उपलक्ष्य में ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमएमपीएलबी) की ओर से लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बोल रही थी।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को बराबरी का दर्जा तभी संभव है जब वे एकजुट हों।

पूरी दुनिया की औरतों की आवाज अगर एक हो जाए तो यह बुलंद होगी। यह तभी संभव है जब हम संगठित हो जाएं।

हिंदू और इस्लाम धर्म ने महिलाओं को समान अधिकार दिए हैं। मुस्लिमों में निकाह के समय लड़की की मर्जी पूछने का रिवाज है, यह उसे बराबरी का दर्जा और सम्मान इस्लाम में मिला हुआ है।
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पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि मैं जिस स्कूल में जाती हूं। वहां अभिभावकों और शिक्षकों से कहती हूं कि लड़कियों को जूडो-कराटे सिखाएं।

दूसरे पर हुकुम चलाना तो मानवीय प्रकृति है और सबसे कमजोर इसके लिए बीबी और लड़की ही मिलती है।

इस कमजोरी को खत्म करना होगा। इसके लिए लड़कियों को आत्मरक्षा के लिए जूडो-कराटे सिखाइए।

लड़कियों को शिक्षित बनाइये। इससे उनकी हिम्मत बढ़ेगी। आज तो सेना में भी लड़कियां भर्ती हो रही है।

महिलाओं के अपने हक मांगने पर उन्होंने कहा कि पुरुष यह न समझें कि महिलाएं उनके खिलाफ लड़ाई छेड़ रही हैं।

यह लड़ाई पुरुषवादी मानसिकता के खिलाफ है। किसी भाई, पिता या पति के खिलाफ नहीं।

..तब खुद बनीं प्रेरणा
पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने अपने कार्यकाल के समय की एक घटना का जिक्र  करते हुए बताया कि एक बार एयर चीफ मार्शल ने सुपरसोनिक प्लेन में मुझसे उड़ान भरने का आग्रह किया।

सुपरसोनिक प्लेन में दबाव बढ़ने से खून की नस फटने का डर रहता है इससे जान भी जा सकती है।

उनका मानना था कि सेना के सुप्रीम कमांडर और महिला होने के चलते राष्ट्रपति अगर ऐसा करती हैं तो इससे दूसरे जवानों की हौसला अफजाई होगी जोकि ऐसा करने से डर रहे थे।
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मैंने बखूबी इस चुनौती को अपनाया और सफल उड़ान भरी। इसके लिए तीन महीने तक मुझे फिटनेस टेस्ट से गुजरना पड़ा।

आसान न था राष्ट्रपति बनना
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैं हिम्मत पर लगातार जोर दे रही हूं। यह समझ लीजिए कि बिना हिम्मत के राष्ट्रपति तो मैं नहीं बन सकती थी। आप सभी लोग जानते हैं कि एक महिला के लिए राजनीति कितनी कठिन है।

मेरा राजनीति में आकर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचना आसान नहीं था। महिलाओं से मेरी अपील है कि आप भी हिम्मत दिखाएं।
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