फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आयुष डॉक्टरों ने मंत्री के सामने रखी मांग, बोले- एलोपैथ की तर्ज पर मिले इलाज का अधिकार

Fri, 27 Jul 2018 04:05 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
डेमो
विज्ञापन

केंद्र और राज्य सरकार ने आयुष विधा को बहुत महत्व दिया है। इसमें हर कोई अपना इलाज करना चाहता है। राज्य सरकार इसके प्रचार-प्रसार में जुटी है। पूर्व सरकारों में आयुष विधा के साथ सौतेला व्यवहार हुआ। आयुर्वेद व यूनानी को हिन्दू मुस्लिम विचारधारा में बांट दिया।

विज्ञापन


यह बातें बृहस्पतिवार को आयुष राज्यमंत्री धर्म सिंह सैनी ने कही। वह इंस्टीट्यूट फॉर सोशल हारमोनी एंड अपलिफ्टमेंट की ओर से आयुष आपके द्वार कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस मौके पर आयुष डॉक्टरों ने एलोपैथ की तर्ज पर इलाज का अधिकार मांगा।
सचिव आयुष मुकेश मेश्राम ने कहा, आयुर्वेदिक एवं यूनानी विधा से इलाज सबसे ज्यादा कारगर है।

इसमें दवाओं का मरीज पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। विदेशों में इस विधा की दवाओं के लिए शोध होता है। यूपी के डॉक्टरों को भी चाहिए कि वे ज्यादा से ज्यादा रिसर्च करें। शासन उनकी हर संभव मदद करेगा। नेशनल यूनानी डॉक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सलमान खालिद ने कहा कि आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथिक डॉक्टर भी दूसरी विधा के डॉक्टरों की तरह पढ़ाई करके आते हैं।
विज्ञापन


मगर, इनसे सौतेला व्यवहार होता है। इन डॉक्टरों को झोलाछाप या फर्जी न कहा जाए। कुछ दिन पहले एक छापे में अधिकारियों व पुलिस ने आयुष डॉक्टरों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया। जमीन पर बिठाकर अभद्रता की। एसोएिशसन इसकी घोर निंदा करता है।

Trending Videos
विज्ञापन

ग्लूकोज चढ़ाने का अधिकार मिले

डेमो - फोटो : amar ujala
डॉ. अब्दुल हलीम काजमी ने मंत्री के सामने कहा, प्रदेश के किसी भी आयुर्वेद या यूनानी मेडिकल कॉलेज में नीट के आधार पर एडमिशन की स्थिति साफ  नहीं है। इससे छात्रों के साथ कॉलेज प्रबंधन भी परेशान है। इस पर मंत्री ने कहा कि पूर्व में यूनानी, आयुर्वेद या होम्योपैथिक कॉलेजों में दाखिले से लेकर परीक्षा तक में काफी गड़बड़ी की जाती थी। इसलिए अब नीट के जरिए एडमिशन का फैसला हुआ है।

फहमीना अस्पताल के डॉ. सलमान ने कहा, इमरजेंसी में मरीजों को ग्लूकोज चढ़ाने जैसे प्राथमिक इलाज का अधिकार आयुष डॉक्टरों को मिलना चाहिए। गरीब मरीज उल्टी दस्त या अन्य किसी बीमारी में आयुष डॉक्टर के पास ही पहले जाता है। यह अधिकार न होने से मरीजों के इलाज में दिक्कत आती है। कार्यक्रम में मिशन निदेशक यतींद्र मोहन, सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, इंस्टीट्यूट के चेयरमैन अनीस अंसारी समेत कई अफसर मौजूद रहे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें