डॉ. संजीव रस्तोगी
आयुर्वेद के उपचार से 83 वर्षीय बुजुर्ग को लगाई गई पेशाब के थैली हट गई है। बुजुर्ग वृद्धावस्था में मांसपेशियों की कमजोरी की वजह से पेशाब ठीक से न निकल पाने की समस्या से ग्रसित थे। ऐसे में उनको स्थायी रूप से पेशाब की थैली लटकानी पड़ रही थी। इसे एल्सेवियर के अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल जेएआईएम में प्रकाशन के साथ मान्यता मिली है।
यह अध्ययन राजकीय आयुर्वेद कॉलेज से सेवानिवृत्त डॉ. संजीव रस्तोगी और डॉ. शास्वत रस्तोगी ने किया है। डॉ. संजीव रस्तोगी ने बताया कि पुरुषों में वृद्धावस्था में मूत्र की थैली का कमजोर हो जाना और उसके कारण पेशाब का ठीक से ना निकल पाना आमतौर पर पाई जाने वाली समस्या है। ठीक से पेशाब न निकल पाने की वजह से कई बार यह वापस गुर्दे की तरफ़ जाने लगती है। इसकी वजह से गुर्दे में सूजन और संक्रमण की समस्या भी होने लगती है। इस समस्या के निदान के लिए पेशाब की नलकी लगाकर पेशाब को बाहर निकाल देना ही एक सुलभ उपाय के रूप में प्रचलित है। इस पेशाब की नलकी को दिन में कई बार सफाई के साथ लगाया जा सकता है। इसकी वजह से बार-बार पेशाब की नली में संक्रमण होने की आशंका रहती है। नोएडा निवासी इन बुजुर्ग को इसी समस्या के चलते कैथेटर के द्वारा पेशाब को निकाले जाने की सलाह दी गई। करीब दो साल से उन्हें पेशाब की थैली लेकर चलनी पड़ती थी। ऐसे में उन्हें लखनऊ में आयुर्वेद उपचार की जानकारी हुई। वर्ष 2022 से उन्होंने उपचार शुरू किया। उपचार के एक वर्ष के अंदर ही उनकी पेशाब की नली हट गई। इस बीच में उन्हें एक बार भी पेशाब की नली का संक्रमण नहीं हुआ। एक वर्ष के आयुर्वेदिक उपचार के बाद उनकी चिकित्सा अब बंद हो गई है और अभी तक उन्हे पेशाब से संबंधित कोई समस्या नहीं है। डॉ. रस्तोगी ने बताया कि वे अब तक देश और विदेश के 100 से भी अधिक ऐसे रोगियों का आयुर्वेदिक उपचार कर चुके हैं और लगभग सभी में बेहतर परिणाम मिले हैं।