अयोध्या में लगाए जाने वाले श्रीराम स्तंभ।
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भगवान श्रीराम की वन गमन यात्रा की स्मृतियों को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए अयोध्या में दस प्राचीन स्थलों पर श्रीराम स्तंभ स्थापित किए जाएंगे। इसकी तैयारी तेज हो गई है। हाल ही में विहिप की एक बैठक भी कारसेवकपुरम में हुई। बैठक में तय किया गया कि श्रीराम स्तंभ लगाने का काम नंदीग्राम भरतकुंड से किया जाएगा। सभी दस स्थलों को चिन्हित कर लिया गया है।
नंदीग्राम भरतकुंड वही स्थान है जहां भरत ने 14 वर्षों तक तप किया था। पूर्व योजना के अनुसार पहला स्तंभ मणिपर्वत पर स्थापित किया जाना था, जो त्रेतायुगीन महत्व का स्थल माना जाता है। यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से संरक्षित घोषित है।
बताया जा रहा है कि यह श्रीराम स्तंभ लगाने की अनुमति विहिप को पुरातत्व विभाग से नहीं मिल सकी है। इसके चलते अब पहला श्रीराम स्तंभ नंदीग्राम भरतकुंड पर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा बताते हैं कि प्रत्येक स्तंभ की ऊंचाई 15 फीट, जबकि चौड़ाई 2.5 फीट होगी। यह स्तंभ वंशी पहाड़पुर के लाल पत्थरों पर बनाए गए हैं, जिन पर हजारों वर्षों तक काई नहीं जमेगी। बताया कि श्रीराम स्तंभ स्थापित करने की कवायद तेज हो गई, जल्द ही पहला स्तंभ स्थापित किया जाएगा।
इन स्थलों पर स्थापित होगा स्तंभ
- रामनगरी में 10 स्थान चिन्हित किए गए हैं जो राम की वनगमन यात्रा के गवाह हैं और त्रेतायुगीन माने जाते हैं। इन स्थलों पर राम मंदिर परिसर, रामकुंड, हनुमान भरत मिलन नंदीग्राम, भरतकुंड नंदीग्राम, जटा कुंड नंदीग्राम, दशरथ समाधि बिल्वहरि घाट, विभीषण कुंड, सुग्रीव कुंड, हनुमान कुंड व सीता कुंड शामिल है।