अयोध्या में निर्मित भव्य राम मंदिर।
- फोटो : amar ujala
सर गाड़ी का नंबर नोट है, देख लीजिए, राम मंदिर दर्शन के लिए जाना है। सुरक्षाकर्मी बोलते हैं, नंबर देखने की जरूरत नहीं है, आप जा सकते हैंं। दिल्ली के श्रद्धालु अमरनाथ साहू मुस्कुरा कर जय श्रीराम बोलते हुए आगे बढ़ जाते हैं। थोड़ी देर बाद निखिल गोस्वामी अपना चार पहिया वाहन लेकर आते हैं, सुरक्षाकर्मी को यलो जोन का पास दिखाते हैं, सुरक्षाकर्मी फिर कहते हैं, इसकी जरूरत नहीं, आप जा सकते हैं। यह दृश्य टेढ़ी बाजार बैरियर का है। जहां से अब तक वही चार पहिया वाहन गुजर पाते थे, जिनका नंबर कंट्रोल रूम से नोट कराया गया हो या फिर जिनके पास यलो जोन का पास है, लेकिन शनिवार को यहां बैरियर हटा दिए गए। रोक-टोक भी खत्म हो गई। इसके चलते श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय नागरिकों का आवागमन अयोध्याधाम में पहले की तुलना में काफी सुगम हो गया है।
1993 में बने एक्ट के बाद रामकोट में बढ़ गए प्रतिबंध
छह दिसंबर 1992 की घटना के बाद रामकोट में प्रतिबंध बढ़ा दिए गए थे। इसके बाद 1993 में अयोध्या एक्ट बनाया गया, जिसके बाद प्रतिबंधों में और इजाफा हो गया। पांच जुलाई वर्ष 2005 को राम जन्मभूमि पर हुए आतंकी हमले के बाद रामकोट को सुरक्षा प्रतिबंधों में जकड़ दिया गया। स्थानीय लोगों के लिए यलो जोन के पास बनाए गए। स्थानीय निवासियों को रोजाना असुविधा का सामना करना पड़ता था।
अयोध्या धाम में यातायात प्रतिबंधों की बेड़ियां यूं ही नहीं खोली गई हैं। चर्चा है कि लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट पर भाजपा की पराजय के बाद शासन-प्रशासन की आंख खुली है। भाजपा की पराजय के बाद से अयोध्या वासियों को सोशल मीडिया पर कोसा भी जा रहा था। इसके बाद रामनगरी के साधु-संतों ने प्रतिक्रिया भी दी थी। संतों ने भाजपा की हार का एक कारण अयोध्या में बेवजह के यातायात प्रतिबंधों को भी बताया था। महंत अवधेश दास कहते हैं कि रणनीतियां बनाने में शासन व प्रशासन से चूक हो गई। जो काम अब प्रशासन कर रहा है, वहीं पहले कर दिए होते तो आज शर्मिंदा न होना पड़ता। उनका इशारा लोकसभा चुनाव में भाजपा की पराजय की ओर था। अबकी रामनवमी मेले में इस कदर प्रतिबंध लागू कर दिए गए थे कि श्रद्धालुओं की संख्या बहुत कम रही। भक्त अपने गुरु आश्रमों व मठ-मंदिरों तक पहुंच ही नहीं पाए। सीमाओं पर ही वाहनों को रोक दिया जाता था। साधु-संतों के साथ अयोध्या का हर एक नागरिक और यहां आने वाले श्रद्धालु इन प्रतिबंधों से परेशान थे।
प्रशासन का यह अच्छा निर्णय है। आए दिन प्रवेश के लिए पुलिस से नोक-झोंक होती थी। गोवंशों के लिए भूसा लाने की गाड़ियां तक नहीं आ पातीं थीं। पुलिस से बात करने पर जांच-पड़ताल के बाद ही वाहनों को प्रवेश मिलता था। -महंत शशिकांत दास
पिछले कुछ वर्षों से रामकोट वासी कैद से हो गए थे। चार पहिया वाहन लेकर रामकोट में प्रवेश करना मुश्किल था। शादी-विवाह, भंडारा आदि कार्यक्रमों में स्थानीय लोगों को परेशानी होती थी। भक्त मंदिर तक बड़ी मुश्किल से पहुंच पाते थे। प्रशासन का निर्णय सराहनीय है। -महंत जयराम दास
रामकोट के दुकानदारों की बुरी हालत थी। दुकानदारी के लिए माल तक लाने में परेशानी होती थी। आए दिन सुरक्षाकर्मियों से व्यापारियों की बहस होती थी। सुरक्षा प्रबंधों में ढील का सबसे ज्यादा लाभ निश्चित रूप से व्यापारियों को मिलेगा। - पंकज गुप्त, व्यापारी
रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के बाद बढ़े प्रतिबंधों ने परेशानी बढ़ा दी थी। स्कूल जाने वाले बच्चे तक परेशानी झेलते थे। टेढी बाजार, रामघाट व नयाघाट से चार पहिया वाहनों को प्रवेश मिलता ही नहीं था। अब प्रतिबंधों में कुछ कमी की गई है। प्रशासन का यह देर से लिया गया अच्छा निर्णय है। - डॉ. आनंद उपाध्याय, चिकित्सक