अब तक सबसे ज्यादा दक्षिण भारत के शंकराचार्य आदि ने मठ एवं आश्रम के लिए भूखंड लिया है। आवास विकास के अपर आवास आयुक्त एवं सचिव डॉ. नीरज शुक्ला ने बृहस्पतिवार को बताया कि मठ, आश्रम एवं होटलों के लिए जो भूखंड आवंटित किए गए उनकी जमीन 2000 वर्ग मीटर से लेकर 10 हजार वर्ग मीटर तक है।
राम लला की जन्मस्थली अयोध्या में शंकराचार्य ज्येंद्र सरस्वती और जगदगुरु वीर सिंह आदि के मठ एवं आश्रम बनने का रास्ता साफ हो गया है। आवास एवं विकास परिषद ने अब तक अयोध्या में 13 मठ एवं 6 होटलों के लिए भूखंड का आवंटन कर दिया है। इसके साथ ही गुजरात एवं उत्तराखंड राज्यों के गेस्ट हाउस के लिए भी भूखंड आवंटित हो गया है।
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हालांकि, अब तक सबसे ज्यादा दक्षिण भारत के शंकराचार्य आदि ने मठ एवं आश्रम के लिए भूखंड लिया है। आवास विकास के अपर आवास आयुक्त एवं सचिव डॉ. नीरज शुक्ला ने बृहस्पतिवार को बताया कि मठ, आश्रम एवं होटलों के लिए जो भूखंड आवंटित किए गए उनकी जमीन 2000 वर्ग मीटर से लेकर 10 हजार वर्ग मीटर तक है।
आवास विकास ने शंकराचार्य ज्येंद्र सरस्वती को 2700 वर्ग मीटर, कर्नाटक के जगदगुरु वीर सिंह के मठ के लिए 10,500 वर्ग मीटर, तमिलनाडू के अहो बिला ट्रस्ट को 2700 वर्ग मीटर, कानपुर के श्रीकृष्ण कृपा महाराज ने 4000 वर्ग मीटर, शिवगंगा शारदा मठ बंगलुरु ने 2700 वर्ग मीटर, बालाजी सेवार्थ फाउंडेेशन इंदौर के विनोद अग्रवाल ने 2700 वर्ग मीटर का भूखंड का आवंटन कर दिया है। आवास विकास ने मठ एवं होटलों के लिए जमीन खरीदने वालों से 60 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से कीमत वसूल की है।
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राज्यों के गेस्ट हाउस के लिए जमीन आरक्षित
अयोध्या में अब तक उत्तराखंड ने 7000 वर्ग मीटर एवं गुजरात ने 9000 वर्ग मीटर जमीन गेस्ट हाउस के लिए ली है। अपर आवास आयुक्त ने बताया कि यूं तो देश भर के सभी राज्यो के लिए अयोध्या में गेस्ट हाउस का निर्माण करने के लिए जमीन को आरक्षित करते हुए छोड़ दिया गया है।