अयोध्या के विवादित ढांचा विध्वंस मामले में सत्र अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली दो लोगों की अपील पर सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में सीबीआई और राज्य सरकार ने आपत्ति जताई। दोनों के वकीलों ने कहा कि अपीलकर्ता केस के पीड़ित नहीं हैं। ऐसे में बरी किए गए अभियुक्तों/पक्षकारों के खिलाफ यह अपील दायर करने का उन्हें हक नहीं है। कोर्ट ने सीबीआई और राज्य सरकार के वकीलों की अपील पर आपत्ति दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया। इसके बाद हफ्ते भर में अपीलकर्ताओं को आपत्ति पर जवाब पेश करना होगा।
न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति सरोज यादव की खंडपीठ ने यह आदेश अयोध्या निवासी हाजी महबूब अहमद व सैयद अखलाक अहमद की ओर से दाखिल अपील पर दिया। कोर्ट ने अपील की ग्राह्यता के सवाल, जैसा कि सीबीआई व राज्य सरकार के वकीलों ने उठाया, पर गौर करने के लिए मामले को पांच सितंबर को समुचित बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।
इससे पहले एकल पीठ ने दोनों अपीलकर्ताओं के पुनरीक्षण याचिका को आपराधिक अपील के रूप में बदलने का आदेश दिया था। कोर्ट ने यह आदेश निगरानी याचिका दायर करने वालों के वकीलों के आग्रह पर दिया था। इसमें अयोध्या ढांचा विध्वंस मामले में बरी किए गए पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती समेत सभी 32 लोगों को दोषी करार दिए जाने की गुजारिश भी की गई है।