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विश्व स्तनपान सप्ताह : राज्यपाल ने कहा- अस्पतालों में प्रसव पर शत प्रतिशत स्तनपान की व्यवस्था हो

Mon, 01 Aug 2022 09:51 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

राज्यपाल ने निर्देश दिया कि सभी जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्रसव केंद्रों पर बोर्ड लगाकर उस दिन होने वाले प्रसव तथा स्तनपान कराने का समय अनिवार्य रूप से अंकित किया जाए।
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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि अस्पतालों में प्रसव पर शत प्रतिशत स्तनपान की व्यवस्था की जाए। क्योंकि मां का दूध सर्वोत्तम आहार है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि मां द्वारा स्तनपान कराने की दर में वृद्धि नहीं हो रही है। इसलिए जागरुकता पर जोर देने की जरूरत है। वह सोमवार को राजभवन में विश्व स्तनपान सप्ताह केतहत चलने वाली गतिविधियों के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रही थीं।

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राज्यपाल ने कहा कि स्तनपान सप्ताह की वैश्विक थीम स्तनपान प्रोत्साहन, समर्थन एवं सहयोग रखा गया है। इसलिए सामाजिक स्तर पर इसमें सभी का योगदान आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्रसव केंद्रों पर बोर्ड लगाकर उस दिन होने वाले प्रसव तथा स्तनपान कराने का समय अनिवार्य रूप से अंकित किया जाए।

ग्रामीण इलाके में संस्थागत प्रसव की जानकारी के लिए एप विकसित किया जाए, जिसमें प्रसव के बाद शिशु को स्तनपान की जानकारी भी ली जाए। ग्राम प्रधानों से संपर्क कर संस्थागत प्रसव को बढावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस समय चार में से मात्र एक शिशु को जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान कराया जाता है। यह चिंता का विषय है। जबकि प्रदेश में लगभग 84 प्रतिशत संस्थागत प्रसव हो रहे हैं। इस दौरान राज्यपाल ने स्तनपान को प्रोत्साहन देने वाले विभाग द्वारा लांच किए गए पोस्टर का विमोचन भी किया।
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माताओं को जागरुक करने की जरूरत : ब्रजेश पाठक
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग नई पीढ़ी की शारीरिक मजबूती, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है। ऐसे में शिशुओं के स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की प्राकृतिक क्षमता के लिए माताओं से स्तनपान में वृद्धि न होना चिंतन का विषय है। समाज और विशेष रूप माताओं को जागरूक करने की आवश्यकता है। राज्य मंत्री मंयकेश्वर शरण ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में यह आंकड़ा शहरी क्षेत्रों में कम है। पढ़ी-लिखी महिलाएं ही भ्रांतियों के कारण इस कार्य से पीछे हट रही हैं, जिन्हे प्रोत्साहित करने की जरूरत है।

केजीएमयू की बाल रोग विशेषज्ञ डा. माला कुमार ने बताया कि राज्य में प्रति 10 बच्चों में केवल छह बच्चे ही छह माह तक मां का दूध पीते हैं। सकल जन्मदर में 24 प्रतिशत बच्चे ही पहले एक घंटे के भीतर मां का दूध पा रहे हैं। इस दौरान विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद, अपर मुख्य सचिव राज्यपाल महेश कुमार गुप्ता, एनएचएम निदेशक अपर्णा उपाध्याय, विशेष सचिव प्रांजल यादव आदि मौजूद रहे।

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