आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अयोध्या के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि किसान समृद्ध होगा तो देश और समाज संपन्न होगा। खेती में लोगों का स्वास्थ्य भी छिपा है। किसानों को सामूहिक खेती की तरफ आगे बढ़ना होगा। इससे न सिर्फ उन्हें बेहतर बाजार मिलेगा, बल्कि उनकी आय भी बढ़ेगी।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति डॉ. आनंद कुमार सिंह ने कहा कि बदलते दौर में खेती में भी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) व अन्य तकनीक का प्रयोग बढ़ रहा है। किसानों को चाहिए कि वे इसकी जानकारी रखें। अगर दिक्कत है तो कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) से जानकारी लें।
कृषि निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार तोमर ने कहा कि सरकार की ओर से किसानों को खाद, बीज, यंत्र सहित हर स्तर पर अनुदान दिया जा रहा है। इससे खेती की लागत कम हुई है। किसान सक्रिय होकर खेती करें तो इससे ज्यादा मुनाफा अन्य किसी कार्य में नहीं है।
उद्यान निदेशक डॉ. विजय बहादुर द्विवेदी ने कहा कि एकीकृत बागवानी विकास मिशन में किसानों को सहयोग दिया जा रहा है। हाईटेक नर्सरी की स्थापना के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में 100 फीसदी अनुदान और निजी क्षेत्र में 50 फीसदी अनुदान की व्यवस्था है।
इसी तरह टिश्यूकल्चर लैब की स्थापना के लिए निजी क्षेत्र में 40 फीसदी अनुदान की व्यवस्था है। फूलों की खेती पर लघु एवं सीमांत किसानों को 40 हजार और अन्य किसानों को 25 हजार रुपया अनुदान दिया जा रहा है। इसी तरह अन्य तमाम योजनाएं हैं, जिनके जरिए फल, फूल की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उप्र कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ संजय सिंह ने कहा कि योगी सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) से किसानों को आर्थिक मजबूती मिल रही है। प्रदेश सरकार ने हर जिले के मशहूर उत्पादों को बड़ा प्लेटफार्म दिया है।
प्रतापगढ़ के आंवले का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि आंवला से बने उत्पादों को विदेशों में नयी पहचान मिली है। सिद्धार्थनगर के काला नमक चावल से बने बिस्किट भी अपनी खुशबू से लोगों का मन मोह रहे हैं। इनकी बाजार में मांग तेजी से बढ़ रही है। किसानों को अन्य चावलों की किस्मों से भी बिस्किट बना कर लाभ उठाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि अयोध्या और मुजफ्फरनगर में बने गुड़ से कई अन्य उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं, जिनको लोगों ने काफी पसंद किया है। पहले खाली गुड़ बेचकर किसानों को सीमित आय ही होती थी, लेकिन उससे बने उत्पादों ने मूल्य संवर्धन किया और किसानों की आय बढ़ रही है। हाथरस के हींग, कन्नौज के इत्र और कौशाम्बी के केले से बने वस्त्रों ने अपनी अलग पहचान बनायी है।
डॉ संजय सिंह ने बताया कि कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन में महिलाओं का बड़ा योगदान है। कई महिलाओं ने छोटे-छोटे समूह बनाकर कृषि उत्पादों से कई अन्य उत्पाद बनाए हैं। आंवले से मुरब्बा, केले से वस्त्र, काला नमक चावल से बिस्कुट के अलावा कई अन्य उत्पादों से मूल्य संवर्धन करके महिलाएं अपने सशक्तिकरण को साकार कर रही हैं।