विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज
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विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बुधवार से शुरू कराई गई मध्यस्थता बैठक पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब यह सिद्ध हो चुका है कि जहां रामलला विराजमान हैं वहीं उनकी जन्मभूमि है तो फिर मध्यस्थता किस लिए? सर्वोच्च न्यायालय आगे आकर इस बात की घोषणा करे कि जो विभाजन हुआ वह गलत था और जहां रामलला विराजमान हैं वही उनकी जन्मभूमि है। मध्यस्थता तो लेनदेन के लिए होती है।
हिंदू समाज 500 वर्षों से अपने प्रभु की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर देखने के लिए तरस रहा है। उन्होंने दोहराया कि अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा में किसी भी नई मस्जिद का निर्माण नहीं होगा।
उन्होंने कहा अब सर्वोच्च न्यायालय को एक ही बात का निर्णय घोषित करना था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने जो परिसर का विभाजन किया है, वह मुकदमे की मूल प्रार्थनापत्र के विरुद्ध है। अब सर्वोच्च न्यायालय ने मध्यस्थता की बात कह कर तीन लोगों की टीम घोषित की है कि जो संबंधित पक्षों के साथ बैठकर मध्यस्थता कर किसी निर्णय पर पहुंच सके।
कहा कि 70 वर्षों से उलझी इस न्यायिक प्रक्रिया से हिंदू समाज को मुक्ति मिलनी ही चाहिए। विदेशी आक्रांता बाबर के नाम पर मस्जिद या किसी भी प्रकार के भवन का निर्माण इस देश की सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन मूल्यों पर हमले की भांति होगा। जिसे किसी कीमत पर वर्तमान पीढ़ी स्वीकार नहीं करेगी।