उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान की ओर से वर्ष 2020 के लिए पुरस्कारों की घोषणा की गई है। इसमें राजधानी के व्यंग्यकार व कवि पंकज प्रसून को उत्तर प्रदेश भाषा सम्मान से नवाजा गया है। उनके अलावा चार अन्य लोगों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान की ओर से 10 विभूतियों को शब्द शिल्पी सम्मान से नवाजा गया है जिसमें से दो लखनऊ से हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय की डॉ. अलका पांडेय और डॉ. गोविंद स्वरूप गुप्ता को यह सम्मान दिया गया है।
पंकज प्रसून को यह सम्मान उन्हें उत्तर प्रदेश एवं भाषा केक्षेत्र में साहित्यिक- विनिमय, सौहार्द, समृद्धि और समन्वय को मजबूत करने के लिए दिया गया है। उप्र. भाषा संस्थान, भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए 1994 में स्थापित सरकारी संस्थान है जिसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। इस बार ये पुरस्कार संस्थान केकार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राज नारायण शुक्ल और निदेशक हरिबख्श सिंह की मौजूदगी में आयोजित एक ऑनलाइन समारोह में प्रदान किए गए। डॉ. राज नारायण शुक्ल ने बताया कि पंकज प्रसून ने विज्ञान के गूढ़ सिद्धांतों को हास्य व्यंग्य और कविता से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। पंकज प्रसून की अब तक पांच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और दो बार उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से भी सम्मानित किया जा चुका है।
उत्तर प्रदेश भाषा सम्मान पाने वाली विभूतियां
- पंकज प्रसून, लखनऊ।
- डॉ. अमित कुमार भारती, संत कबीरनगर।
- अमित कुमार मल्ल, कानपुर।
- डॉ. मुरारीलाल अग्रवाल, फिरोजाबाद।
- डॉ. उन्नत बहादुर सिंह, प्रयागराज।
शब्द शिल्पी सम्मान पाने वाली विभूतियां
- डॉ. अलका पांडेय, लखनऊ।
- डॉ. मुकेश चंद गुप्ता, मुरादाबाद।
- डॉ. बृजेश कुमार पांडेय, प्रयागराज।
- डॉ. सत्य प्रकाश पाल, वाराणसी।
- डॉ. गोविंद स्वरूप गुप्ता, लखनऊ।
- डॉ. वीणा शर्मा, गाजियाबाद।
- डॉ. सतीश चतुर्वेदी ‘शाकुंतल’, एटा।
- डॉ. गीता पांडेय, गाजियाबाद।
- डॉ. एचएल विश्वकर्मा, दिल्ली।
- गीता टंडन, अहमदनगर, महाराष्ट्र।