फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रशासनिक पदों पर सालों से जमे 150 डॉक्टरों ने सालों से एक नब्ज भी नहीं टटोली, ऑफिस में बैठ सिर्फ फाइलें कर रहे साइन

विज्ञापन
विज्ञापन
हिमांशु अवस्थी
विज्ञापन

लखनऊ। एक ओर राजधानी के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी है तो दूसरी ओर करीब 150 डॉक्टर ऐेसे हैं, जिन्होंने इलाज करने के नाम पर आज तक एक मरीज की नब्ज तक नहीं टटोली है। प्रशासनिक पदों पर जमे ये डॉक्टर सरकार से करोड़ों रुपये का वेतन भी ले चुके हैं, लेकिन मरीजों के इलाज से इन्हें कोई लेना-देना नहीं है। ये सिर्फ ऑफिस के एसी कमरों में बैठकर फाइलें साइन कर रहे हैं। कई डॉक्टर तो बिना मरीज देखे रिटायर भी हो गए। स्वास्थ्य महानिदेशालय, एनएचएम, परिवार कल्याण निदेशालय से लेकर सीएमओ ऑफिस तक ऐेसे डॉक्टरों की फौज है। मुख्यमंत्री के आदेश पर अब इनकी सूची तैयार की जा रही है।
राजधानी में बड़ी संख्या में डॉक्टर प्रशासनिक पद पर हैं। इनमें बेहोशी, जनरल सर्जरी, आर्थोपैडिक, बाल रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन, कैंसर रोग समेत अन्य विधा के डॉक्टर हैं। वहीं, सीएचसी से लेकर सरकारी अस्पतालों तक डॉक्टरों का संकट हैं। इससे मरीजों की सर्जरी से लेकर सामान्य इलाज तक प्रभावित हो रहा है।
विज्ञापन

स्वास्थ्य महानिदेशालय में एडिशनल डायरेक्टर, डायरेक्टर मिलाकर करीब 107 डॉक्टर हैं। इन्होंने न तो सालों से कोई सर्जरी की और न ही किसी मरीज को देखा। ये सभी डॉक्टर अफसर बनकर सिर्फ अपने अधीन कर्मचारियों को निर्देश जारी कर रहे हैं। इसी तरह एनएचएम में करीब 15 डॉक्टर व परिवार कल्याण में 20 से अधिक डॉक्टर व सीएमओ ऑफिस में एडिशनल सीएमओे, डिप्टी सीएमओ मिलाकर 10 से अधिक डॉक्टर हैं, जो राष्ट्रीय कार्यक्रमों के संचालन में लगे हैं। इनका मरीजों के इलाज से संबंध नहीं है। इस बाबत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक पद पर कार्यरत डॉक्टरों को मरीजों को इलाज मुहैया कराना होगा। इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है।
सीएचसी पर एक आर्थोपैडिक, बाल रोग विशेषज्ञ नहीं
राजधानी की शहरी-ग्रामीण इलाकों की सीएचसी पर एक भी आर्थोपैडिक सर्जन व बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में ग्रामीण इलाके की 15 लाख से अधिक आबादी अब भी इनकी सेवा से वंचित है। वहीं, इसके विशेषज्ञ डॉक्टर महानिदेशालय से लेकर सीएमओ ऑफिस में प्रशासनिक पद पर हैं। इन डॉक्टरों ने सालों से एक भी सीएचसी पर जाकर मरीजों को देखा तक नहीं है।
विज्ञापन

सरकारी अस्पताल में कैंसर रोग विशेषज्ञ भी नहीं
बलरामपुर, सिविल, बीआरडी महानगर, रानीलक्ष्मीबाई समेत अन्य किसी भी बड़े सरकारी अस्पताल में कैंसर रोग विशेषज्ञ नहीं है। इससे मरीजों को निजी संस्थान जाना पड़ता है। वहां भी इलाज की दुश्वारियां व वेटिंग झेलनी पड़ रही है। ऐसा तब है जब सीएमओ के अधीन एक एडिशनल सीएमओ कैंसर रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। इन्होंने भी चार-पांच साल में एक भी मरीज सरकारी अस्पताल या सीएचसी जाकर नहीं देखा गया। इसी तरह सीएमओ ऑफिस में बाल रोग, नेत्र रोग विशेषज्ञ समेत अन्य विधा के डॉक्टरों की लंबी फेहरिस्त हैं। मरीज का इलाज छोड़ ये सभी राष्ट्रीय कार्यक्रमों का क्रियान्वयन कर रहे हैं। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. डीएस नेगी का कहना है कि महानिदेशालय में तैनात डॉक्टरों के पास राष्ट्रीय कार्यक्रमों के संचालन को लेकर काफी भार है। इसके बाद भी कुछ डॉक्टरों को अस्पताल में भेजकर सेवाएं दिलवाना शुरू कराया जा रहा है। मरीजों के हित में उचित फैसला आगे भी लिया जाएगा। वहीं, सीएमओ डॉ. संजय भटनागर ने कहा कि विभाग में जितने अफसर हैं, हर एक को सीएचसी का नोडल बनाया गया है। ये सीएचसी पर जाकर टीकाकरण के साथ इलाज भी करेंगे। इसकी मासिक रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
महानिदेशालय में तैनात डॉक्टर
गाइनेकोलॉजिस्ट - 18
बेहोशी के डॉक्टर - 10
बाल रोग - 10
जनरल सर्जरी - 05
आर्थोपैडिक - 05
नेत्र रोग विशेषज्ञ - 10
टीबी एंड चेस्ट- 6
(इनके अलावा अलग-अलग और विशेषज्ञ तैनात हैं)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें