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Video: नाश्ते के पैसे मांगने पर मां-बेटे को कार से कुचलने की कोशिश, शराब के नशे में थे अधिवक्ता व साथी

Mon, 25 Nov 2024 09:47 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ

सार

नाश्ता करने के बाद अधिवक्ता व उसके साथी जाने लगे तो फास्टफूड संचालक ने पैसे मांगे। दबंगों ने पैसा क्यूआर कोड पर भेजने की बात कही थी। ट्रांजेक्शन न होने पर सत्येंद्र ने विरोध किया तो आरोपी गाली-गलौज करने लगे।
विवाद बढ़ा तो आरोपियों ने ठेले में तोड़फोड़ की और मां-बेटे को कार से कुचलने का प्रयास किया। 
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ट्रामा सेंटर में भर्ती सत्येंद्र। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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नाश्ते के पैसे मांगने पर नशे में धुत कार सवार हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने साथियों संग मिलकर फास्टफूड संचालक व उसकी मां को पीट दिया। फिर दोनों को कार से कुचलने का प्रयास किया। किसी ने घटना का वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाल दिया। पीजीआई पुलिस ने पांच के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।

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बाबू खेड़ा निवासी सत्येंद्र कुमार रावत वृंदावन सेक्टर-18 में ट्राॅमा सेंटर के निकट चौराहे पर फास्ट फूड का ठेला लगाते हैं। शनिवार रात वह और उनकी मां सविता ठेले पर थे। रात 10:45 बजे कार से अधिवक्ता अमित पाठक व चार अन्य लोग पहुंचे। सभी नशे में धुत थे। नाश्ता करने के बाद सभी जाने लगे तो सत्येंद्र ने पैसे मांगे। दबंगों ने पैसा क्यूआर कोड पर भेजने की बात कही थी। ट्रांजेक्शन न होने पर सत्येंद्र ने विरोध किया तो आरोपी गाली-गलौज करने लगे।

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विरोध पर ठेला संचालक को पीटना शुरू कर दिया। चीखने पर सविता जब बचाव करने पहुंचीं तो आरोपियों ने उन्हें भी जमकर पीटा। इस दौरान किसी भी राहगीर ने दबंगों को रोकने का प्रयास नहीं किया। आरोपियों ने ठेले में तोड़फोड़ की और मां-बेटे को कार से कुचलने का प्रयास किया। किसी तरह दोनों ने जान बचाई। सत्येंद्र का आरोप है कि दबंगों ने थाने में शिकायत करने पर हत्या करने की धमकी दी और भाग निकले।
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युवक का पैर टूटा
इस बीच किसी ने घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। आसपास के लोगों ने सत्येंद्र व उनकी मां को एपेक्स ट्राॅमा सेंटर पहुंचाया। प्राथमिक उपचार कर सविता को छुट्टी दे दी गई। सत्येंद्र का इलाज चल रहा है। उनका एक पैर टूट गया है।

पीजीआई के डॉक्टर की पत्नी के नाम पर है कार
इंस्पेक्टर रवि कुमार त्रिपाठी के अनुसार फुटेज में कैद कार की नंबर प्लेट की जांच की गई। इसमें पता चला कि गाड़ी पीजीआई में तैनात डॉक्टर की पत्नी के नाम पर पंजीकृत है। पूछताछ में डॉक्टर ने बताया कि करीब एक महीने पहले उन्होंने अमित पाठक को कार बेची थी। पर उसके नाम ट्रांसफर नहीं हुई थी।


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