बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के कुलपति प्रो. एनएमपी वर्मा पर सोमवार देर रात अज्ञात लोगों ने उस वक्त हमला कर दिया, जब वे विवि से साइकिल से अपने साउथ सिटी स्थित आवास जा रहे थे। हमले में उन्हें हाथ और पैर में चोट लगी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने आशियाना थाने में अज्ञात के खिलाफ एफआईआर के लिए तहरीर दी है। कुलपति बीबीएयू परिसर में रोजाना सुबह व शाम साइक्लिंग करते हैं। सोमवार को भी वे विभाग से साइकिल से गेट नंबर दो से निकलकर साउथ सिटी स्थित आवास जा रहे थे।
इस बीच घात लगाए दो अज्ञात युवकों ने उन्हें आवाज दी। जब उन्होंने साइकिल धीमी की तो पीछे से उन पर डंडे से हमला बोल दिया। युवकों ने उनके साथ अभद्रता व मारपीट की। बचने के लिए वे कॉलोनी में ही बीबीएयू प्रोफेसर एसके द्विवेदी के घर में घुस गए।
इस बीच, कॉलोनी के लोग जुटने लगे तो हमलावर भाग निकले। प्रोफेसर व अन्य लोग वीसी को पास के अस्पताल ले गए, जहां से लोकबंधु रेफर कर दिया गया। सूचना मिलते ही काफी संख्या में शिक्षक व विद्यार्थी अस्पताल पहुंचे। मारपीट करने वाले परिसर से बाहर के बाहर के बताए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस कॉलोनी के लोगों से पूछताछ कर हमलावरों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।
दो पर शक, लेकिन खुलासा नहीं करेंगे
इलाज कराते कुलपति प्रो.एनएमपी वर्मा
- फोटो : amar ujala
बताया जा रहा है कि कुलपति प्रो. वर्मा का छात्रों के साथ कभी कोई विवाद नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठता है कि हमला किसने किया या करवाया? चर्चा है कि इस घटना के पीछे कोई शिक्षक या अधिकारी-कर्मचारी तो नहीं हैं। प्रो. वर्मा ने अपने सहयोगियों से बातचीत में कहा कि उन्हें दो लोगों पर आशंका है, लेकिन उनके नाम अभी सार्वजनिक नहीं करेंगे।
मांसपेशियों में चोट, फ्रैक्चर नहीं
कुलपति प्रो. वर्मा देर शाम अस्पताल लाए गए। उनका प्राथमिक उपचार किया गया है। किसी तरह का फ्रैक्चर नहीं मिला है। मांसपेशियों में चोट आई है, सेहत सामान्य है।
- डॉ. सुरेश चौहान, सीएमएस, लोकबंधु अस्पताल
होगी सख्त कार्रवाई
अस्पताल में कुलपति के द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर पुलिस को तहरीर दी गई है। विवि प्रशासन अपने स्तर से भी जांच करा रहा है। आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- प्रो. राम चंद्रा, चीफ प्रॉक्टर, बीबीएयू
अखाड़ा बन चुका है परिसर
पिछले दिनों बीटेक परीक्षा को लेकर परिसर में तीन दिन तक तोड़फोड़, बवाल, आगजनी हुई थी। इससे पहले इतिहास विभाग के डॉ. एलसी मलैया के साथ भी मारपीट हो चुकी है। चर्चा ये भी है कि हाल में कुलपति ने कई कड़े फैसले लिए हैं।
एक तरफ गार्डों की संख्या में कमी की गई है तो संविदा कर्मचारी भी निकाले गए हैं। कई शिक्षकों के मामले भी उनके पास लंबित हैं। ऐसे में इस घटना का कोई भी कारण हो सकता है।