सूत्रों का कहना है कि पिस्टल की खरीदारी सिर्फ टेस्टिंग के लिए की गई थी। आतंकियों ने असलहा बेचने वाले से कहा था कि असलहा अच्छा हुआ तो इसकी बड़ी खेप खरीदेंगे। इस दौरान एक साथ सैकड़ों कारतूस की मांग भी की थी।
चमनगंज निवासी युवक ने अपने एक मददगार से कारतूस दिलाने की भी बात कर ली थी। कुछ दिन में असलहों व कारतूस की सप्लाई होनी थी। इसके बाद आतंकी 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर वारदात को अंजाम देते। कारतूस देने वाले तक भी पहुंचने की जद्दोजहद में जांच एजेंसी जुटी हुई है।
एटीएस ने खुरासान मॉड्यूल के खुलासे के बाद कानपुर के 53 लोगों की काउंसिलिंग की थी। आतंकियों का इन लोगों का माइंडवॉश कर गिरोह में शामिल कर लिया था, लेकिन ये किसी आपराधिक घटना में शामिल नहीं हुए थे। इसलिए जांच एजेंसी ने इन पर कार्रवाई नहीं की थी।
हालांकि लगातार इनकी निगरानी होती रही है। अब जब अलकायदा के आतंकी पकड़े गए हैं तो जांच एजेंसी और सतर्क हो गई है। इन 53 लोगों की मौजूदा गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।