केजीएमयू में हार्ट सर्जरी के बाद मरीज और डॉक्टरों की टीम
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महज ढाई इंच का चीरा, ढाई घंटे की सर्जरी और दिल के छेद की जन्मजात बीमारी से निजात मिल गई। महज 24 घंटे में 13 साल की बच्ची को अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई। यह कमाल किया केजीएमयू के कार्डियो थोरेसिक वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) के डॉ. विजयंत देवनराज की टीम ने।
डॉ. विजयंत देवनराज ने बताया कि मछली मोहाल लखनऊ की रहने वाली 13 वर्षीय तुबा को जन्मजात दिल में छेद (आर्टीरियल सेप्टल डिफेक्ट) था। इसकी वजह से उसकी सांस फूलती रहती थी। वह सामान्य बच्चों की तरह न तो खेल पाती थी और न ही दौड़-भाग पाती थी।
थोड़ी-सी मेहनत से उसकी सांस फूलने लगती थी। तुबा के पिता मो. हरीन उसे ओपीडी में लेकर आए। डॉ. विजयंत के मुताबिक जब परिवारीजनों को यह बताया गया कि बगैर सर्जरी दिल का छेद नहीं बंद किया जा सकता तो वे घबरा गए। डॉ. देवनराज के मुताबिक ऑपरेशन में पूरे सीने को नहीं खोलने का फैसला किया गया।
सिर्फ दाहिनी तरफ बगल से पसलियों के बीच ढाई इंच के एक चीरे से पूरी सर्जरी की गई। इससे हड्डी को नहीं काटना पड़ा और ज्यादा खून भी नहीं बहा। रक्षाबंधन के बाद 19 अगस्त को उसकी सर्जरी की गई और 20 अगस्त को तुबा को डिस्चार्ज कर दिया गया।
सर्जरी में डॉ. विवेक, डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. अजय पांडेय, एनेस्थेटिस्ट डॉ. दिनेश कौशल, पर्फ्यूजनिस्ट मनोज, नवनीत कौर, नर्स एडलीन और मनीषा का सहयोग रहा।