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जब हवाई जहाज छुड़वाने पहुंच गए अटल जी, तब आई कांग्रेस नेता सीताराम की जान में जान

Wed, 25 Dec 2019 11:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
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पूर्व प्रधानमंत्री व लखनऊ के पूर्व सांसद अटल बिहारी वाजपेयी
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किसी नेता के पास यह खबर आए कि उसके संसदीय क्षेत्र में एक विमान का अपहरण हो गया है। अपहरण करने वाला कह रहा है, 'अमुक नेता ने मुझसे मुलाकात न की तो विमान उड़ा दूंगा।' इस स्थिति में शायद ही वह नेता विमान अपहरण करने वाले से मुलाकात करने के लिए जाए। पर, अटल जी तो अलग ही थे।

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श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान की बात है। प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा था। अटल जी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके थे। उस दिन संयोग से वह मीराबाई मार्ग स्थित स्टेटगेस्ट हाऊस में रुके थे और अंदर कमरे में भोजन कर रहे थे। उस कमरे से जुड़े बाहर वाले कमरे में उस समय अब के बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन कुछ लोगों के साथ बैठे थे। अटल जी को रात में दिल्ली वापस लौटना था।

अगले दिन लोकसभा में उन्हें किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर बोलना था। अटल जी ने भोजन शुरू ही किया था कि इतने में लखनऊ के तत्कालीन जिलाधिकारी अशोक प्रियदर्शी और प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल बी. सत्यनारायण रेड्डी के सलाहकार अचानक कमरे में आ गए। टंडन जी ने जैसे ही इन लोगों को कमरे में देखा तो बोले, 'अटल जी भोजन कर रहे हैं और आप लोग सीधे यहां पहुंच गए। तत्कालीन जिलाधिकारी प्रियदर्शी हाथ जोड़ते हुए बोले, 'अमौसी हवाई अड्डे पर एक लड़का दिल्ली जाने वाले हवाई जहाज में चढ़ गया है। वह हथगोला जैसी कोई चीज पकड़े हैं। कह रहा है, 'अटल बिहारी वाजपेयी को बुलाओ, नहीं तो हवाई जहाज उड़ा दूंगा।
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टंडन जी ने कहा, 'इस तरह अटल जी वहां कैसे जा सकते हैं? उन्हें भी तो खतरा हो सकता है।' टंडन जी बताते हैं, 'अटल जी ने शायद यह बात सुन ली। अंदर से बोले, ' चलो! मैं चल रहा हूं। आखिर दो सौ लोगों के जीवन का सवाल है।' मैं अंदर कमरे में गया। देखा कि अटल जी ने पूरा भोजन भी नहीं किया था। मैने कुछ कहने की कोशिश की तो उन्होंने कहा, 'चलो।' हम लोग थोड़ी देर में हवाई अड्डे पर पहुंचे। अटलजी ने टावर पर चढ़कर लड़के से बात की। पर, वह लड़का मानने को तैयार नहीं था कि अटल जी ही बोल रहे हैं।

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और अटल जी विमान के अंदर...

अटल बिहारी वाजपेयी
बकौल टंडन, 'अटल जी बोले, 'हवाई जहाज के पास ले चलो।' सबकी हालत खराब। जैसे-तैसे डीएम प्रियदर्शी के साथ हम लोग जहाज के पास पहुंचे। उसने हमें और अटलजी को अंदर बुलाया। वह अटल जी के पैर छूने के लिए नीचे झुका कि इसी बीच सुरक्षा बलों ने उसे दबोच लिया। लड़के ने हाथ में ली वस्तु को फेंकते हुए कहा, 'यह कुछ नहीं सिर्फ सुतली का गोला है।'

अटल जी ने कहा, 'इसने नादानी और लड़कपन में इस तरह की घटना को अंजाम दे डाला। पर, इसकी जमानत जरूर करा देना। इसका भविष्य न खराब होने पाए।' तभी हम सबने देखा कि एक सीट से कांग्रेस के बड़े नेता और लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे सीताराम केसरी उठकर हम लोगों की तरफ आ रहे हैं।

अटलजी कुछ बोलते कि उससे पहले ही केसरी जी बोले, 'जब हमें मालूम हुआ कि आप लखनऊ में हैं तो मेरी जान में जान आई। भरोसा हुआ कि आप जरूर आ जाएंगे। हम लोग बच जाएंगे।'
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