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अयोध्या पहुंचे विहिप संरक्षक, मुसलमानों को दी चेतावनी

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रामजन्मभूमि पर बुधवार सुबह रामलला का दर्शन करने के बाद विहिप के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक व रामजन्मभूमि न्यास के प्रमुख ट्रस्टी अशोक सिंहल ने फिर केंद्र सरकार को घेरा।
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कहा कि सुप्रीम कोर्ट में विवादित स्थान जहॉं रामलला विराजमान है (110 गुणे 97 फीट) को छोड़ कर शेष 70 एकड़ अधिगृहित भूमि का केंद्र सरकार विकास करे। श्रद्धालुओं को दर्शन आदि में आनी वाली बाधाएं दूर कर सुविधाएं दी जाए।

वेद मंदिर मार्ग से दर्शन की व्यवस्था हो। इसे लेकर केंद्र सरकार को चाहिए कि एक डेलीगेशन अयोध्या भेजे। दर्शन के बाद पत्रकारों से बातचीत में श्री सिंहल ने कहा कि  जनवरी 1993 में केंद्र की तत्कालीन सरकार ने 70 एकड़ भूमि अधिग्रहण कर लिया, वह भूमि आज जंगल के रूप में अव्यवस्थित हैं।
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इस पर श्रद्धालुओं को सुरम्य वातावरण प्राप्त हो इसके लिए उद्यान के रूप में विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा राम जन्मभूमि पर जाने वाला मार्ग काफी लम्बा है जिसकी दूरी कम करनी चाहिए।

वेद मंदिर के सामने हो दर्शन मार्ग

अशोक सिंहल ने मांग की कि केंद्र सरकार दर्शन के लिए वेद मंदिर के सामने से मार्ग बनाए। उन्होंने कहा वेद मंदिर से राम जन्मभूमि की दूरी काफी कम हो सकती है जिससे वृद्ध एवं असहाय दर्शनार्थी सुलभता से दर्शन कर सकते हैं।

यह सम्पूर्ण भूमि केन्द्र सरकार के अधीन है इसके विकास पर न्यायालय को भी कोई आपत्ति नहीं हो सकती क्योंकि न्यायालय ने भी सुलभ दर्शन कराने का निर्देश दे रखा है।

सिंहल ने कहा कि अब तक राम जन्मभूमि की सुरक्षा के नाम पर दस हजार करोड खर्च हो चुके हैं। इतनी बड़ी मात्रा में धन का अपव्यय नहीं होना चाहिए था।  उन्होंने कहा देश के सैन्य स्थल, एयरपोर्ट तथा अन्य स्थलों की सुरक्षा पर इतना व्यय नहीं हुआ, जितना राम जन्मभूमि पर किया गया। अशोक सिंहल ने कहा कि सुरक्षा हो, लेकिन श्रद्धालुओं को असुविधाएं न हो। केंद्र सरकार इन सभी विषयों को लेकर एक डेलीगेशन अयोध्या भेजे, जिससे इन सुविधाओं में सुधार हो सके।

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हम भी कर सकते हजारों दावे

अशोक सिंहल ने कहा कि रामजन्मभूमि समेत काशी और मथुरा को लेकर वे मुसलमान अपना दावा वापस लें, तभी मधुर संबंध बनेंगे। कहा कि विहिप हमेशा मुसलमानों से मधुर संबंध चाहती है, लेकिन तीनों स्थलों के दावे जबतक वे वापस नहीं लेंगे, तबतक कैसे संभंव है।

उन्होंने कहा देश में आपसी सौह्रार्द के लिए श्रीराम जन्मभूमि, श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ इन तीनों पर से मुस्लिम समाज को अपने दावे वापस ले लेने चाहिए। उन्होंने कहा जस्टिस अहमदी ने भी कभी कहा था कि किसी नाबालिग को पूर्ण अधिकार है कि वह अपनी सम्पत्ति प्राप्त करने के लिए कभी भी दावा कर सकता है।

उन्होंने कहा ऐसे में मुस्लिम समाज को सोचना चाहिए कि देश में दस हजार से ऊपर मुकदमें श्रीराम जन्मभूमि की भांति हिन्दू समाज कर सकता है, इससे मुस्लिम समाज को बचना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम सेन्ट्रल वक्फ बार्ड और सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड को भी इस विषय पर गंभीरता से विचार करने को कहा।

सिंहल ने कहा अगले माह से श्रीराम जन्मभूमि कार्यशाला के लिए पत्थरों की खेप अयोध्या पहुंचने लगेगी। श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए लगभग दो लाख घनफुट पत्थर लगने हैं जिसमें से एक लाख घनफुट पत्थरों पर नक्काशी का काम पूर्ण हो चुका है।

शेष एक लाख घनफुट पत्थर श्रीराम जन्मभूमि न्यास ने समाज से दान के रूप में प्राप्त करने का आवाह्न किया है।

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