लखनऊ। किसी भी विपरीत परिस्थितियों से निपटने में सक्षम सेना के अधिकारी अब साइबर और फोरेंसिक की गूढ़ जानकारी हासिल करेंगे। इसके लिए उप्र स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस ने तीन महीने का विशेष कोर्स तैयार किया है। प्रोफेशनल डिप्लोमा इन साइबर टेक एंड लीगल गवर्नेंस के पहले बैच का मंगलवार को डीजी विजिलेंस राजीव कृष्णा ने शुभारंभ किया।
एक बैच में 40 अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। डीजी विजिलेंस ने कहा कि साइबर अपराध आम नागरिकों ही नहीं, देश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है। इससे निपटने के लिए हमें जागरूक और सतर्क रहना होगा। उन्होंने बताया कि हाल ही में हुई पुलिस कांस्टेबल की भर्ती में भी साइबर अटैक का सामना करना पड़ा। आज के समय में ड्रोन फोरेंसिक का महत्व बढ़ा है। अपराधी ड्रोन का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अवैध तस्करी के लिए कर रहे हैं। इससे निपटने में प्रशिक्षण अहम भूमिका निभाएगा। संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने कहा कि यह युग एआई का है।
संस्थान का फोकस विशेष रूप से लॉ विथ लैब पर है, क्योंकि लॉ की जानकारी हुए बिना इस क्षेत्र की संपूर्णता नहीं हो सकती। संस्थान के लिए साइबर विषयों पर सेना के अधिकारियों को प्रशिक्षित करना गर्व का विषय है। मेजर जनरल अनिरुद्ध साखरे ने कहा कि साइबर स्पेस, युद्ध का पांचवां आयाम बन चुका है। सेना के अधिकारियों के लिए डिजाइन यह विशेष कोर्स भारतीय रक्षा प्रणाली को मजबूत आधार प्रदान करेगा। आईआईआईटी के निदेशक प्रो. अरुण मोहन सेरी ने कहा कि साइबर दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि उसके अनुसार कानून बनाना एक चुनौती बन गया है। कानूनों का निर्माण बदलाव को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। आईएएस अधिकारी नेहा जैन ने साइबर फोरेंसिक से संबंधित एक साप्ताहिक कोर्स प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भी शुरू करने का अनुरोध किया। कार्यक्रम में डीन एसपी राय, अरुणखत्री, एआर सीएम सिंह आदि शामिल हुए।