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कहीं आप भी अवैध भवन में तो नहीं रह रहे?

Fri, 21 Nov 2014 11:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
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विकास प्राधिकरण के दायरे में आने वाले इलाकों में जिला पंचायतों से पास नक्शे पर बनाए गए भवन अवैध हैं। आवास विभाग ने विकास प्राधिकरणों से ऐसे भवनों की सूची तलब की है।
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हालांकि सरकार इन्हें वैध करने के लिए भी रास्ते तलाश रही है। इसके एवज में विकास शुल्क लिया जा सकता है।

शहर के भीतरी इलाकों में जमीनें महंगी होने की वजह से बिल्डर बाहरी इलाकों में गांवों की सस्ती जमीनें खरीद कर उन पर टाउनशिप विकसित कर रहे हैं या फिर अपार्टमेंट बना रहे हैं।

बिल्डर मनचाही कीमतों पर इन्हें बेच कर करोड़ों रुपये मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि विकास प्राधिकरणों को कुछ नहीं मिल रहा है। लिहाजा शासन ने पहले ही ऐसे इलाकों में जिला पंचायतों को नक्शा पास करने पर रोक लगा दी थी।
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प्रमुख सचिव आवास सदाकांत का कहना है कि विकास प्राधिकरण के दायरे में जिला पंचायत से नक्शा पास कराकर अपार्टमेंट या फिर स्कूल, कॉलेज बनाना पूरी तरह से अवैध है।

हालांकि उन्होंने कहा कि आम जनता के हितों का ध्यान रखते हुए जिला पंचायत से नक्शा पास कराकर अपार्टमेंट बनाने वालों को विकास प्राधिकरण से वैध कराने का मौका देने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इसके एवज में इनसे विकास शुल्क लिया जा सकता है।
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अब आशियाना हुआ महंगा

एलडीए समेत प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों में मकान का नक्शा पास कराना 17 फीसदी तक महंगा हो गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने बुधवार से विकास शुल्क की बढ़ी दर लागू कर दी है।

राजधानी में 200 रुपये प्रति वर्ग मीटर की बढ़ोतरी हुई है। अब तक 1200 रुपये वर्गमीटर की दर से विकास शुल्क लगता था जो कि अब 1400 रुपये हो गई है। इससे आशियाना बनाना महंगा होगा तो निजी टाउनशिप में भी फ्लैट महंगे मिलेंगे।

पिछले दिनों गठित कमेटी ने विकास शुल्क बढ़ाने संबंधी अपनी सिफारिश शासन को मंजूरी के लिए भेजी थी। इस पर शासनादेश होने के बाद एलडीए ने इसे लागू भी कर दिया।

इससे इंटीग्रेटेड और हाईटेक टाउनशिप के लिए जमा होने वाली सिटी डवलपमेंट फीस की दरें भी बढ़ गई हैं। विकास नीति बनाने के लिए शासन के निर्देश पर बनी कमेटी के प्रस्ताव को आवास महकमे की हरी झंडी मिल चुकी है।
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मकान में पार्किंग तो खोल सकेंगे दुकान

मकान में दुकानों को वैध करने की तैयारी हो चुकी है। शासन ने करीब डेढ़ साल पुराने प्रस्ताव को बदलने का निर्देश एलडीए को दिया है। प्राधिकरण नियमों में बदलाव करते हुए प्रस्ताव बनाने में जुटा है।

जल्द ही प्रस्ताव दोबारा शासन को भेज दिया जाएगा। नए प्रस्तावों के तहत मकान में दुकान खोलने के लिए पार्किंग और सेटबैक की सुविधा होने की शर्त रखी गई है।

पिछली बार भेजे गए प्रस्ताव में यह व्यवस्था नहीं थी। फिलहाल जो नियम हैं, उसके मुताबिक 18 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क पर एलडीए रिहायशी लैंडयूज में व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देगा।

मिश्रित भू उपयोग के तहत एलडीए ने मकान में दुकान को वैध करने के लिए कई नियम बनाए हैं। इन नियमों में पेशे के हिसाब से सड़क की चौड़ाई निर्धारित है।

18 मीटर से कम चौड़ी सड़क पर कोई भी कारोबारी गतिविधि मकान में नहीं चलाई जा सकेगी। जबकि 18 मीटर से अधिक और 24 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क के दो मानक तय किए गए हैं।
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