बीते कई महीने से चल रही जद्दोजहद के बाद आखिरकार राज्य सरकार ने प्रदेश के ताप बिजलीघरों के लिए आयातित कोयले की खरीद को हरी झंडी दे ही दी। अगस्त और सितंबर में 5.5 लाख मीट्रिक टन आयातित कोयले की खरीद के प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई। इसी के साथ ही प्रदेश के ताप बिजलीघरों में घरेलू कोयले के साथ-साथ आयातित कोयले के इस्तेमाल का रास्ता साफ हो गया।
आयातित कोयले से बिजली की उत्पादन लागत में होने वाली वृद्धि की भरपाई के लिए राज्य सरकार पावर कार्पोरेशन को 1098 करोड़ रुपये सब्सिडी के रूप में उपलब्ध कराएगी ताकि उपभोक्ताओं पर दरों का बोझ न बढ़े। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि कोल इंडिया ने प्रदेश के बिजलीघरों के कोल आवंटन में कमी कर दी है जिससे आने वाले दिनों में बिजली संकट पैदा होने की आशंका थी।
इसके चलते आयातित कोयला खरीदने का फैसला किया गया है। गौरतलब है कि प्रदेश के बिजलीघरों के लिए रोजाना 15-17 रैक कोयले का आवंटन है लेकिन कोल इंडिया की ओर से 11-12 रैक कोयले की ही आपूर्ति की जा रही है। ऐसे में अगस्त-सितंबर में बिजलीघरों में कोयले का भारी संकट खड़ा होने की आशंका है।
डेढ़ महीने में ही सरकार ने पीछे खींचे कदम
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय मई से ही यूपी पर आयातित कोयले की खरीद का दबाव बना रहा है। आयातित कोयला न खरीदने पर घरेलू कोयले में कटौती की चेतावनी भी दी गई थी। बिजली दरों में इजाफा होने की संभावना होने के मद्देनजर राज्य सरकार ने मई में ही साफ कर दिया था कि वह आयातित कोयला नहीं खरीदेगी।