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UP: बिजलीघरों के लिए आयातित कोयला खरीदने की मिली मंजूरी, केंद्र के दबाव में सरकार को लेना पड़ा फैसला

Wed, 13 Jul 2022 09:56 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

प्रदेश के ताप बिजलीघरों में घरेलू कोयले के साथ-साथ आयातित कोयले के इस्तेमाल का रास्ता साफ हो गया। आयातित कोयले से बिजली की उत्पादन लागत में होने वाली वृद्धि की भरपाई के लिए राज्य सरकार पावर कार्पोरेशन को 1098 करोड़ रुपये सब्सिडी के रूप में उपलब्ध कराएगी ताकि उपभोक्ताओं पर दरों का बोझ न बढ़े।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
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विस्तार
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बीते कई महीने से चल रही जद्दोजहद के बाद आखिरकार राज्य सरकार ने प्रदेश के ताप बिजलीघरों के लिए आयातित कोयले की खरीद को हरी झंडी दे ही दी। अगस्त और सितंबर में 5.5 लाख मीट्रिक टन आयातित कोयले की खरीद के प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई। इसी के साथ ही प्रदेश के ताप बिजलीघरों में घरेलू कोयले के साथ-साथ आयातित कोयले के इस्तेमाल का रास्ता साफ हो गया।
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आयातित कोयले से बिजली की उत्पादन लागत में होने वाली वृद्धि की भरपाई के लिए राज्य सरकार पावर कार्पोरेशन को 1098 करोड़ रुपये सब्सिडी के रूप में उपलब्ध कराएगी ताकि उपभोक्ताओं पर दरों का बोझ न बढ़े। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि कोल इंडिया ने प्रदेश के बिजलीघरों के कोल आवंटन में कमी कर दी है जिससे आने वाले दिनों में बिजली संकट पैदा होने की आशंका थी।

इसके चलते आयातित कोयला खरीदने का फैसला किया गया है। गौरतलब है कि प्रदेश के बिजलीघरों के लिए रोजाना 15-17 रैक कोयले का आवंटन है लेकिन कोल इंडिया की ओर से 11-12 रैक कोयले की ही आपूर्ति की जा रही है। ऐसे में अगस्त-सितंबर में बिजलीघरों में कोयले का भारी संकट खड़ा होने की आशंका है।
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डेढ़ महीने में ही सरकार ने पीछे खींचे कदम
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय मई से ही यूपी पर आयातित कोयले की खरीद का दबाव बना रहा है। आयातित कोयला न खरीदने पर घरेलू कोयले में कटौती की चेतावनी भी दी गई थी। बिजली दरों में इजाफा होने की संभावना होने के मद्देनजर राज्य सरकार ने मई में ही साफ कर दिया था कि वह आयातित कोयला नहीं खरीदेगी। 
 
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20 मई को विशेष सचिव ऊर्जा अनिल कुमार ने आदेश जारी किया था कि प्रदेश के सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के बिजलीघर कोयला आयात नहीं करेंगे। उधर, केंद्र की ओर से लगातार पड़ रहे दबाव के कारण राज्य सरकार को झुकना पड़ गया। अंतत: मई के आदेश को पलटते हुए सरकार ने आयातित कोयले की खरीद पर मुहर लगा दी।

उपभोक्ता परिषद ने जताया एतराज
प्रदेश के ताप बिजलीघरों के आयातित कोयले की खरीद के फैसले पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने एतराज जताया है। परिषद का कहना है कि भले ही आयातित कोयले का अतिरिक्त भार उपभोक्ताओं पर न डाला जाए लेकिन भविष्य में जनता और प्रदेश को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। 3000 रुपये मीट्रिक टन लागत के घरेलू कोयले की जगह 20 हजार रुपये मीट्रिक टन की कीमत वाले विदेशी कोयले की खरीद से जहां राज्यों को भारी चपत लगेगी वहीं एक निजी  घराने को फायदा होगा। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। 

उपभोक्ता परिषद प्रदेश और उपभोक्ताओं के हित में इसके खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 20 मई को आयातित कोयला न खरीदने का फैसला किया गया तो डेढ़ महीने में ऐसा क्या हो गया जिसकी वजह से सरकार को इसकी मंजूरी देनी पड़ रही है। दुर्भाग्य की बात यह है कि जिस कोल इंडिया की जिम्मेदारी बिजलीघरों को घरेलू कोयला उपलब्ध कराने की है वही दबाव में आयातित कोयला खरीदकर ज्यादा कीमत पर राज्यों को आपूर्ति करने पर आमादा है।
 
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