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ये अपार्टमेंट होंगे सील, नहीं मिलेगा बिजली-पानी कनेक्शन!

Mon, 04 May 2015 11:16 AM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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राज्य सरकार छोटे बिल्डरों की मनमानी पर नकेल कसने जा रही है। नक्शा पास कराए बिना बन रहे अपार्टमेंट सील तो होंगे ही, इन्हें लेने वालों को बिजली-पानी का कनेक्शन भी नहीं मिलेगा।
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साथ ही यह भी प्रचार-प्रसार कराया जाएगा कि ऐसे अपार्टमेंट में फ्लैट लेने वाले स्वयं जिम्मेदार होंगे। विकास प्राधिकरण ऐसे अपार्टमेंट को अभियान चलाकर सील भी कराएंगे।

इसके बाद भी कोई अपार्टमेंट बनकर तैयार हो जाता है तो संबंधित क्षेत्र के अभियंता के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग इस संबंध में जल्द ही शासनादेश जारी करने वाला है।
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शहरों में आबादी बढ़ने के बाद जमीनों के दाम आसमान छूने लगे हैं। छोटे-छोटे बिल्डर जमीनें खरीद कर उस पर नियम विरुद्ध अपार्टमेंट बना रहे हैं। इनका न तो नक्शा पास होता है और न ही ये मानक पूरा करते हैं।

समाजवादी आवास को परवान चढ़ाने के लिए हुआ एक्‍शन

राज्य सरकार ने कम कीमत पर लोगों को छत मुहैया कराने के लिए समाजवादी आवास योजना शुरू की है। इस योजना में 10 से 30 लाख रुपये में लोगों को फ्लैट मुहैया कराए जाएंगे।

आवास विभाग चाहता है कि समाजवादी आवास योजना परवान चढ़े और इसका फायदा आम आदमी को मिले। यह तभी संभव है जब शहरों में बन रहे छोटे-छोटे अवैध अपार्टमेंट पर रोक लगाई जाए।

आवास विभाग इसके लिए जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने वाला है। इसमें फ्लैट बनाने के मानक तय किए जाएंगे। छोटे बिल्डर यदि अपार्टमेंट बनाकर फ्लैट बेचते हैं तो उसे विकास प्राधिकरणों से नक्शा पास कराना अनिवार्य होगा।

जितने फ्लोर का नक्शा पास कराया जाएगा उतना ही निर्माण कराया जा सकेगा। फ्लैटों पर कब्जा देने से पहले इसका निर्माण पूरा कराते हुए विकास प्राधिकरणों से कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। इसके बिना यदि फ्लैट बेचा जा रहा है तो संबंधित बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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यह है मानक

मानक के अनुसार 22,000 वर्ग फीट से कम जमीन पर आवासीय फ्लैट बनाने का मानचित्र विकास प्राधिकरणों से पास नहीं हो सकता। बिल्डर को मानचित्र पास कराने से पहले जल संस्थान, नगर निगम और अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना होता है।

इसके बाद विकास प्राधिकरणों में गठित तकनीकी समिति इसका नक्शा पास करती है। कुल जमीन पर डेढ़ गुना निर्माण की इजाजत विकास प्राधिकरण देते हैं। ऐसे अपार्टमेंट में आवंटियों की सुविधाओं के लिए सभी जरूरी इंतजाम करने होते हैं।

...और यूं हो रहा खेल

छोटे बिल्डर तीन से पांच हजार वर्ग फीट जमीन पर विकास प्राधिकरणों से ग्राउंड प्लस फर्स्ट फ्लोर का नक्शा पास कराते हैं और इसके ऊपर दो फ्लोर अतिरिक्त बनाते हैं।

मसलन कुल चार फ्लोर का अपार्टमेंट खड़ा कर लिया जाता है। इसके बाद मनचाही कीमतों पर फ्लैटों को बेचा जाता है। अवैध रूप से बनने वाले ऐसे अपार्टमेंट से होने वाली आमदनी का हिस्सा बिल्डर के साथ-साथ विकास प्राधिकरण और संबंधित क्षेत्र के थानों तक जाता है।
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