उन्होंने शिकायती पत्र को विश्वविद्यालय प्रशासन के आला अधिकारियों को भेजा। साथ ही छात्रा के कक्षा में जाकर खुद उससे बात की। छात्रा ने बताया कि एक दिन ऐसा हुआ था, दोबारा उसे कोई समस्या नहीं हुई। इस पर बृहस्पतिवार को उसने निदेशक को पत्र लिखकर शिकायत वापस लेने की बात कही।
साथ ही कहा कि दोबारा उसके साथ ऐसा कुछ होता है तो विश्वविद्यालय प्रशासन ठोस कार्रवाई करे। प्रॉक्टोरियल बोर्ड की बैठक में यह मामला रखा गया। बोर्ड के सामने आरोपित तीनों छात्रों को भी बुलाया गया और उनसे लिखित लिया गया कि दोबारा वो छात्रा से किसी तरह की बातचीत नहीं करेंगे। अन्यथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
बैठक में शोध छात्र संजय उपाध्याय का भी मुद्दा आया। इसमें उसने सुपरवाइजर से मारपीट के आरोप में खुद के निलंबन को वापस लेने और पीएचडी अवार्ड कराने की मांग की थी। प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सामने शोध छात्र ने कहा कि वह गलती मानने को तैयार हैं और इसके लिए सुपरवाइजर से भी मिलकर बात करेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी पीएचडी पूरी कराए। प्रॉक्टर प्रो. रामचंद्रा ने बताया कि इस पर सहमति बनी लेकिन इससे पहले शोध छात्र अपने शिक्षक से संपर्क करेगा।