चौक चौपटियां में भीतर जाने पर मौजूद संदोहन देवी मंदिर लखनऊ के प्राचीन मंदिरों में शुमार है। बताया जाता है कि करीब 400-500 साल पहले एक भक्त को स्वप्न आया कि मौजूदा मंदिर परिसर के कुंड में पिंडी स्वरूप में मां विराजी हैं।
स्वप्न के बाद भक्तों ने कुंड से मां के पिंडी स्वरूप को निकाला और उसे स्थापित किया। इसके बाद यहां धीरे-धीरे अन्य प्रतिमाएं विराजीं, हाल ही में कुंड का जीर्णोंद्धार हुआ है। हर छह माह में एक बार नवरात्र के बाद एकादशी के दिन माता संपूर्ण शृंगार में चरणों के दर्शन देती हैं।
तमाम मनौतियां लेकर आते हैं भक्त
माता संदोहन देवी मंदिर
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तमाम मनौतियां लेकर भक्त यहां धार्मिक आयोजनों में भी जुटते हैं। मंदिर में मंगलवार, शनिवार को शाम के समय सुंदरकांड पाठ, शुक्रवार को देवी भजन समेत अन्य आयोजन होते हैं। मंदिर के पुजारी पं. बृजमोहन बताते हैं कि मंदिर में माता के अलावा उद्गम कुंड, वैष्णो माता, काली माता, राधाकृष्ण, गणेश, हनुमद, भैरव, सरस्वती माता, संतोषी माता, शिव पार्वती, लक्ष्मी नारायण, राम दरबार, जगन्नाथ भगवान, नवग्रह, द्वादश ज्योर्तिलिंग, भीमकाय महादेव संग शनि भगवान भी विराजे हैं।