नियमानुसार 10 साल की सेवा पूरा करने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रमोशन का प्रावधान है, लेकिन इन्हें समय से प्रमोशन नहीं मिला। लिहाजा इन्हें बार-बार निदेशालय आना पड़ता हैं। कई बार प्रमोशन के नाम पर कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों पर उत्पीड़न के आरोप भी लगाए। इसी कारण वर्षों तक प्रमोशन की फाइल निदेशालय में इधर-उधर घूमती रहती हैं।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने यह फैसला संभवत: प्रधानमंत्री के उस निर्देश पर लिया, जिसमें उन्होंने प्रदेश के अति पिछड़े जिलों में कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन पहुंचाने के लिए डीएम से लेकर अन्य विभागों के सक्रिय अधिकारियों को तैनात करने का सुझाव दिया था। यूपी में भी ऐसे आठ जिले चिह्नित किए गए हैं। इनमें सोनभद्र, चंदौली, चित्रकूट, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बहराइच, श्रावस्ती, फतेहपुर हैं।