पुलिस के मुताबिक अजीत ने 2009 में बोनांजा नाम की कंपनी से फ्रेंचाइजी ली। इसके जरिये ट्रेडिंग शुरू की। 2010 में एनी बुलियन फर्म नाम से एक रजिस्ट्रेशन कराया। एक साल तक लोगों से रुपये लोन लेकर कारोबार का झांसा देता रहा। 2010 में ही अजीत ने एनी बुलियन इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी बना ली। इस कंपनी का शेयर ट्रेडिंग मार्केट में एम सी एक्स, एनसीडीएक्स, बीएसई, एनएसई, एमएसई स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्ट्रेशन कराया। 2016 में एनी मार्केटिंग सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड बनाकर पतंजलि स्टोर से जोड़ दिया था।
प्रॉपर्टी के कारोबार में भी हाथ आजमाया
प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक अजीत ने रियल एस्टेट कंपनियों में भी अच्छी खासी रकम निवेश की थी। अजीत एनी राजावत प्राइवेट लिमिटेड, एनी श्री साईं इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनियां बनाकर उसमें हिस्सेदार के रूप में शामिल हुआ। मोटी रकम का निवेश कराया और मुनाफा कमाकर किनारे हो गया। अजीत की कंपनियों के छह साथियों को ईडी ने इसी साल गोरखपुर में गिरफ्तार किया था। उनके पास से 8 किलो सोना 2 किलो चांदी बरामद हुई थी। गिरफ्तार साथियों में सराफा व्यापारी संगठन का पूर्व अध्यक्ष भी शामिल था।
600 करोड़ की अकूत संपत्ति
अजीत गुप्ता ने जालसाजी से 600 करोड़ रुपये की अकूत संपत्ति खड़ी कर ली है। इनकी जानकारी पुलिस को हो चुकी है। प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक अजीत के खिलाफ लखनऊ में पीजीआई, गोमतीनगर, चिनहट, विभूति खंड, चौक थानों में मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा अयोध्या के महाराजगंज, अयोध्या कोतवाली और कुमारगंज, सुल्तानगंज के कोतवाली और बल्दी सराय थाने में मुकदमा दर्ज है।
एनी बुलियन कंपनी में निवेश के नाम पर ठगी के शिकार 11 लोगों ने चिनहट थाने में कंपनी के डायरेक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। प्रभारी निरीक्षक चिनहट क्षितिज त्रिपाठी के मुताबिक रणवीर प्रसाद दुबे, ललित प्रकाश सक्सेना और पंकज अरोरा ने तहरीर दी कि चिनहट के शक्ति रेजिडेंसी निवासी अजीत कुमार गुप्ता ने एनी बुलियन कंपनी में निवेश के नाम पर 20 से 40 फीसदी लाभ का लालच दिया था। उसके झांसे में आकर करीब 60 लाख का निवेश खुद और अपने परिचित, रिश्तेदारों के माध्यम से कराया। इसके बदले में कूट रचित दस्तावेज, बॉन्ड और कुछ एग्रीमेंट आई विजन इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड एवं एनी बुलियन ट्रेडर के दे दिए।
इस कंपनी में अजीत के करीबी और रिश्तेदार ही पदाधिकारी हैं। निवेश की परिपक्वता के समय अजीत ने एक चेक दिया, जो खाते में लगाते ही बाउंस हो गया। प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक तीन आवेदकों के अलावा चेतन सक्सेना, आनन्द सक्सेना, एकता सक्सेना, कान्ता रानी, निर्मला, राजन, सुरेंद्र कुमार, मुकेश लूथरा, अनुपमा दुबे, कान्ती देवी, आशा देवी ने निवेश किया था।
सेना के जवानों की जमा पूंजी भी हड़पी
जालसाज अजीत गुप्ता ने सेना के जवानों को भी नहीं बख्शा। रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली उनकी जमा पूंजी भी इसने हड़प ली। महेश कुमार यादव, तेज बहादुर, ए आर पाठक, आरके त्रिपाठी, विनोद सिंह, नील मथा के रहने वाले हैं। सभी सेना से रिटायर हैं। रिटायमेंट के वक्त मिला इसकी कंपनी में लगाकर शिकार बन गए। शातिर ठग की गिरफ्तारी की सूचना मिली तो थाने पहुंच गए।
सहायक पुलिस आयुक्त डॉ. बीनू सिंह ने सभी को गोमतीनगर थाने मुकदमा दर्ज कराने के लिए भेजा था। शातिर ने पूर्व सैनिक तेज बहादुर यादव से 50 लाख, महेश कुमार यादव से 50 लाख, ए आर पाठक से 58 लाख, आरके त्रिपाठी से 45 लाख और विनोद सिंह से 40 लाख रुपये शातिर ने ठगे हैं।