विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने इतना जरूर कहा कि कोई सांविधानिक संस्था टालमटोल करती है तो केंद्र सरकार को आगे आना चाहिए। विधायिका को समाज की भावना का पालन करना चाहिए।
धर्म संसद के अगुआ संतों में शामिल रामानुजाचार्य हंसदेवाचार्य महाराज ने कानून बनाकर मंदिर का मार्ग प्रशस्त करने के बजाय सरकार को सलाह दी कि वह राष्ट्रपति के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट को पत्र भिजवाए कि शीर्ष अदालत जनवरी के पहले सप्ताह में प्राथमिकता के आधार पर राम जन्मभूमि के केस की सुनवाई करे।
कुछ संत ही राम मंदिर को लेकर मुखर रहे। छत्तीसगढ़ से आए संत बालकदास महाराज ने कहा कि मोदी व योगी को रामलला के कारण पद मिला है। अब याचना नहीं, रण होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘एक बार फिर चक्रव्यूह में अभिमन्यु को घिरने दो, बने अयोध्या में मंदिर सरकार गिरे तो गिरने दो।’
रामानुजाचार्य वासुदेवाचार्य महाराज ने कहा कि इस समय राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष अपने हैं। अब मंदिर नहीं बनेगा तो कब बनेगा। संत आदेश करें, मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ कर देंगे। स्वामी अनंताचार्यजी महाराज ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए अविलंब कानून बनाया जाए। यदि चूके तो फिर सत्ता में विराजमान होने का मौका नहीं मिलेगा।
आरएसएस के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल ने भी कानून बनाकर मंदिर बनाने का जिक्र नहीं किया। उन्होंने गेंद संतों के पाले में डालते हुए कहा कि संघ, संतों की आज्ञा का पालन करेगा। धर्म संसद की अध्यक्षता कर रहे संत परमानंदजी महाराज ने अध्यादेश से पहले मुस्लिमों से राम जन्मभूमि पर दावा छोड़ने की अपील की।