सबसे पहले बात चुनावी समर भूमि की। पश्चिमी यूपी के इन पांच जिलों में विधानसभा की 27 सीटें हैं। यूपी की राजनीति में इन पांच जिलों का खास स्थान है। यहां चुनावी चक्रव्यूह कुछ ऐसा रचा जाता है कि मुकाबला रोमांचक होता है। पिछले चुनाव में भी इन जिलों की 27 सीटों पर तगड़ा मुकाबला हुआ था। किसी और का तो यहां खाता भी नहीं खुला। बयारें इस बार भी कुछ वैसी ही चल रही हैं।
मुरादाबाद : गठबंधन वोट ट्रांसफर करा पाएगा?
बात पीतलनगरी मुरादाबाद की हो और पीतल की चमक न परखी जाए, भला यह कैसे हो सकता है। पीतल मजदूरों से बात करने हम मुरादाबाद के कटघर क्षेत्र पहुंचे। पीतल की भट्टियाें की तरह ही यहां चुनावी ताप था। भट्टी पर काम कर रहे गुलफाम बोले, चुनाव फिर सिर पर है। पर, जनता की सुन कौन रहा है? हम तो पहले भी पीतल गलाते थे आज भी यही काम कर रहे हैं। नेता जरूर मालदार होते जा रहे हैं। वह बोले, मेरी नजर में तो इस बार भाजपा और सपा की सीधी टक्कर है। अजहर अली बोले, गठबंधन असर कर सकता है...। तभी आस मोहम्मद ने उन्हें टोका- सब इतना आसान है क्या? अभी तुम आगे के रंग देखना। देखो भाई, बात चाहे जो भी कहो, पर सरकार तो ठीक ही है। सुकून है। चोरी चकारी भी बंद है। तभी बुजुर्ग शाह आलम बोले, सुन तो रहे हैं कि गठबंधन हुआ है। पर, मेरा कहना है कि क्या सच में ये दल एक-दूसरे का वोट ट्रांसफर करा पाएंगे? हां ये पेच तो है...सबने हां में हां मिलाई। आस मोहम्मद बोले, किसके मन में क्या है, यह तो वही जानेे।
कानून-व्यवस्था पर भी बात कर रहे लोग
कस्बा पाकबड़ा में चाय की चुस्कियां ले रहे लोग भी चुनावी बातों में मशगूल दिखे। यहां मिले शाकिर अली बोले, देखो जी इस बार भैयाजी (अखिलेश यादव) सरकार बनाने की बात कह रहे हैं। दावे कर रहे हैं। पर, उन्होंने अल्पसंख्यकों को आरक्षण देने का वादा किया था, उसे तो पूरा किया नहीं। इस पर तपाक से अभिषेक बोल उठे। अरे नहीं। इस बार माहौल अच्छा बन रहा है। तो शाकिर ने फिर टोका। देखो भाई, विकास से बात बनती है। कानून-व्यवस्था से बात बनती है। हां, यह बात सही है कि सपा-रालोद गठबंधन और भाजपा की इस बार सीधी टक्कर है। रतनपुरी निवासी नईम बोले, इस सरकार में क्या कोई दंगा-फसाद हुआ? नहीं ना...? योगी सरकार को हल्के में मत लेना। ठाकुरद्वारा में मिले प्रमोद सिंह बोले, चुनाव तो साफ है। योगी की ठोको नीति ने अपराधियों को ऐसा ठोका कि पानी मांग रहे हैं। ठाकुर विनेश ने भी हां में हां मिलाई। लेकिन प्रदीप सिंह बोले, भाई किसान तो परेशान ही रहा...। पर, यह भी सही है कि कानून-व्यवस्था बड़ा मुद्दा है।
अमरोहा : गंगा पार वालों पर टिकी है नजर
अमरोहा जिला गंगा के तट पर बसा है। यहां के वोटरों के दिल की बात जानने निकले तो सामने आया कि गंगा के दूसरी पार यानी मेरठ, गाजियाबाद, बागपत आदि जिलों के मतदाताओं के मिजाज पर इन लोगों की पैनी नजर है। लोग चर्चाओं में अक्सर कहते मिल जाते हैं कि भैया ‘पार वालों का पता नहीं, किस करवट ऊंट बैठा दें।’ हालांकि, यह क्षेत्र तो हिंदू-मुस्लिम की बराबर की आबादी वाला है। लग रहा है कि मुस्लिम सपा के साथ हैं और उसकी भाजपा से सीधी टक्कर है। रालोद भी साथ गया तो मजबूती आ जाएगी पर जाट किसके साथ हैं कैसे कहें? ड्यौढ़ी उर्फ हादीपुर गांव के प्रधान कहते हैं कि सब बंटवारे का खेल, खेल रहे हैं। लोग औवेसी को भी समझ रहे हैं। वह बस वोट काट रहे हैं। अनिल कुमार कहते हैं, लोग बसपा को हल्के में ले रहे हैं। बहनजी की सोशल इंजीनियरिंग रंग ला रही है। हम तो पक्के हैं ही, साथ में ब्राह्मण भी आ रहे हैं। ऐसे में मायावती को कमतर आंकना बड़ी भूल होगी। राजवीर सिंह कहते हैं, यह भी देख लो कि गठबंधन के वोटर भितरघात न कर दें। हां, यह बात जरूर है कि भाजपा हिंदुत्व के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। यह मुद्दा बड़ा है और इसमें कानून-व्यवस्था का तड़का भी लग रहा है।
मुस्लिमों में भी जातियों के मुद्दे
मुस्लिमों में भी इस बार जातियों के मुद्दे कुछ ज्यादा उभार ले रहे हैं। इस उभार ने यदि बंटवारे को आधार दे दिया तो सियासी दलों के समीकरण उलट सकते हैं। इसका असर अमरोहा में देखने को मिला। जोया कस्बे में चुनावी चर्चा की महफिल जमी थी। वाहिद मियां बोले, ‘बसपा तुर्क को टिकट दे रही है। हम तो उसे ही वोट देंगे। तुर्कों की संख्या यहां कम नहीं है। अब भले ही कोई खेमा कहीं जाए, पर हम डिगने वाले नहीं।’ मुस्लिमों में तेली, अंसारी, पठान आदि बिरादरियों में जातीय अस्मिता के ऐसे बोल सुनाई दे रहे हैं। जाट बहुल गांव सरकड़ी अजीज में हम पहुंचे तो चुनावी चर्चाओं का बाजार गर्म मिला। चंद्रपाल सिंह बोले, एक बात तो साफ है कि गुंडागर्दी कम हुई है। कानून-व्यवस्था का मुद्दा क्षेत्र में सबसे बड़ा है और हर वर्ग से जुड़ा है। विकास के काम तो खूब हुए पर यह मुद्दा सब पर भारी है। जो लोग भाजपा को कमतर आंक रहे हैं वो गलत हैं। भाजपा कानून-व्यवस्था का पत्ता यूं ही नहीं चल रही है। लोकेंद्र सिंह कहते हैं, गठबंधन का असर तो खूब है, पर यह कैसे भूल जाएं कि अब क्षेत्र में शांति है। वह कहते हैं, मुकाबला गठबंधन और भाजपा में सीधा पर कड़ा है। धर्मेंद्र भी स्पष्ट रूप से कहते हैं कि एक बात तो साफ है कि एक खेमे में जितनी ज्यादा एकजुटता नजर आएगी, दूसरे खेमे में भी वैसी ही गोलबंदी होगी।
संभल : जाति-धर्म का ही ज्यादा शोर
संभल में भी चुनावी गर्मी बढ़ चुकी है। यहां एक कार गैराज के पास चाय की दुकान पर लोग चुनावी चर्चाओं में मशगूल नजर आए। आलम अली बोले, चुनाव तो साफ है। हां, यह जरूर है कि यह लड़ाई भरोसे की भी है। बड़ा सवाल है कि एक-दूसरे पर कितना भरोसा है। रईस मियां बोले, इस बार तो पिछली बार से तगड़ा चुनाव है। मुद्दों की छोड़ो, पूरा चुनाव जाति-धर्म पर ही होने वाला है। गांव अकबरपुर में मिले मकसूद अली कहते हैं, किसान तो भाई भाजपा के साथ लग रहे हैं। कृषि कानून का मुद्दा खूब चला था। पर, अब इसका असर खत्म होता दिख रहा है। सपा-रालोद गठबंधन के साथ क्या सब किसान जाएंगे? मुझे तो नहीं लगता। तभी जितेंद्र कुमार बोल पड़े, किसान भी साथ आएगा, क्योंकि वह लंबे समय से परेशान चल रहा है। असमौली में भी आलम यही था। नेत्रपाल बोले, कोई कुछ भी कहता रहे कि महंगाई जिस तरह से बढ़ी है उसके असर से भला कैसे इनकार किया जा सकता है। गैस सिलिंडर का दाम आसमान को छू रहा है। अब्बास ने हां में हां मिलाई। वे बोले, सभी परेशान हैं। सामने बैठे प्रदीप ने जवाबी हमला बोलते हुए सवाल उछाला, महंगाई क्या पहले नहीं थी? विकास नहीं देख रहे हो। कानून-व्यवस्था नहीं देख रहे हो। एक दौर था कि लोगों का देर रात घर से निकलना मुहाल था। जावेद बोल उठे, आप सब कुछ भी कहो, चुनाव तो तगड़ा है और आमने-सामने का है।
बिजनौर : चर्चाओं में कानून-व्यवस्था और किसान
बिजनौर में अभी लोग प्रत्याशियों के मैदान में आने का इंतजार कर रहे हैं। आधा दर्जन गांवों को जाने वाले हादरपुर, मंगोलपुरा चौराहा पर चुनावी चर्चाएं होती मिलीं। वीरेंद्र सिंह बोले, देखो भाई, सरकार से नाराजगी तो है। छोटे चौधरी (जयंत) को बड़े चौधरी की जिम्मेदारी मिली है। थोड़ा उनका भी ख्याल रखना होगा। उदय सिंह बोले, इस बार यूपी में किसकी सरकार बनेगी, यह कहना मुश्किल है। हादरपुर के प्रधान गोपाल सिंह बोले, कुछ नाराजगी तो है ही इस बार। देखना है कि कैसे दूर होती है। सुंदरपुर गांव में लोग छोइया के दूषित पानी से परेशान हैं। वे कहते हैं कि आसपास की फैक्ट्रियों का दूषित पानी यहां के भूजल को दूषित कर रहा है। पर, ऐसे मुद्दों को भला चुनाव में कौन सुन रहा है। प्रधान गजेंद्र सिंह बोले, भाजपा के पास हर बिरादरी का वोट है। यह उसकी सबसे बड़ी ताकत है। हमारी तो नहटौर सुरक्षित सीट है। बावजूद इसके चुनाव पूरी गर्मी पर है। हालांकि, सपा-रालोद का गठबंधन कमजोर नहीं है। धामपुर में हलवाई की दुकान पर बैठे लोग भी राजनीतिक चर्चाओं में मशगूल मिले। राजकुमार गौतम बोले, जहां तक मैं देख रहा हूं भाजपा पूरी तरह से मजबूत है। दोबारा लौटेगी। योगी ने कानून-व्यवस्था को जिस तरह से टाइट कर रखा है, उससे हर वर्ग खुश है। प्रदीप ने तत्काल विरोध जताया। बोले, अरे भाई ये तो ठीक है, पर किसान कितना परेशान है, इसे भी तो देख लो। खाद, कीटनाशक सबका रेट बढ़ रहा है। गन्ने का पिछला पेमेंट तक नहीं हुआ। शीशपाल बोले, पेमेंट हो तो रहा है। अब्दुल फरमान बोले, पर सपा को कमजोर मत समझना। इस बार तो रालोद भी साथ है।
नगीना : बसपा को हल्के में लेना गलत
नगीना में अब्दुल सत्तार के यहां लोग आपस में चुनावी चर्चा कर रहे थे। वह बोले, बसपा को लोग हल्के में ले रहे हैं। बसपा इस बार मुस्लिमों पर भी दांव लगाएगी। उसके पास अच्छा और पक्का काडर वोटर है ही। ऐसे में बसपा भी इस दौड़ में पीछे नहीं हैं। बसपा का समीकरण काम कर गया तो कुछ भी हो सकता है। एससी वर्ग के राजपाल बोले, बहनजी की सोशल इंजीनयरिंग पक्की है। कहीं ब्राह्मण को टिकट देंगी तो कहीं मुस्लिम को। कहीं ठाकुर को टिकट दिया जाएगा तो कहीं गुर्जर को। ऐसे में काडर वोटर के साथ प्लस वोटर आएगा तो बात बन जाएगी। वैश्य भी पूरे क्षेत्र में कम नहीं हैं, पर इस बार बंटेंगे।
रामपुर : मुद्दे में आजम खां
रामपुर हमेशा से ही राजनीति के केंद्र में रहा है। रामपुर से नौ बार विधायक रह चुके सांसद आजम खां लंबे समय से जेल में हैं। इस क्षेत्र में सियासी चर्चाओं में आजम खां बड़ा मुद्दा हैं। एक धड़ा है जो साफ कह रहा है कि इस चुनाव में जनता इसका बदला लेगी तो दूसरा धड़ा ऐसा भी है जो कहता है कि जो हुआ, वह सही हुआ। यहां धूप सेंकते मिले साबिर अली बोले, ज्यादतियों का हिसाब होगा। चुनाव तो साफ है। रामपुर के अभेद्य दुर्ग को तोड़ा नहीं जा सकता। आलम बोले, इस बार बदलाव हो रहा है। रफीक ने तुरंत कहा, बहुत कुछ हाथी की चाल पर निर्भर करेगा। ओमकार बोले, मतदाता बंटा हुआ है। कोई भी खुलकर नहीं बोल रहा है। स्वार में मिठाई की दुकान पर बैठे मिले हाफिज अली बोले, देखो भाई, लोगों की तनख्वाहें बढ़ाई जा रही हैं। धार्मिक स्थलों के विकास हो रहे हैं। यात्राएं हो रही हैं। तमाम लुभावनी बातें हो रही हैं। सही बात यह भी है कि इस क्षेत्र में चुनाव धार्मिक आधार पर ही होता है। इस बार भी ऐसा ही होगा। उल्लेखनीय है कि स्वार सीट से जीते आजम खां के पुत्र अब्दुल्ला आजम को आयु मामले में अयोग्य घोषित कर दिया गया था। उनकी विधायकी रद्द हो चुकी है। इस मामले को लेकर भी एक धड़ा बेहद गंभीर है। इसका भी असर यहां दिखेगा।