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शुद्व पानी पीने के लिए नहीं रही प्यूरीफायर की जरूरत!

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ब्रांडेड वॉटर प्यूरीफायर को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) का ‘अमृत कुंभ’ कड़ी टक्कर देगा। बिना बिजली के वॉटर फिल्टर करने की अपनी तीस साल पुरानी इस तकनीकी को अब आईआईटीआर नैनो टेक्नोलॉजी से लैस करने जा रहा है।
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इससे यह कई गुना बेहतर हो जाएगा। इसके लिए आईआईटीआर आईआईटी चेन्नई के साथ संयुक्त रूप से काम शुरू किया है।आईआईटीआर के निदेशक डॉ. आलोक धवन केमुताबिक ‘अमृत कुंभ’ को 1984 में निदेशक रहे डॉ. पीके रे के कार्यकाल में विकसित किया गया था।

इस तकनीक ने 1998-99 में  ओडिशा में आई बाढ़ के दौरान ‘अमृत कुंभ’ ने अपनी उपयोगिता को बखूबी साबित किया। ग्रामीण इलाकों में जहां बिजली नहीं है, वहां भी ‘अमृत कुंभ’ ने लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराया।
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अब इसे एडवांस बनाने की शिद्दत से जरूरत महसूस हो रही थी। लिहाजा इसमें नैनो तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस काम में आईआईटी चेन्नई के वैज्ञानिक और मैटेरियल साइंसेज के विभागाध्यक्ष डॉ. टी प्रदीप को भी शामिल किया गया है। वे आईआईटीआर के वैज्ञानिकों की टीम के साथ काम कर रहे हैं।

ऐसे तैयार किया गया था ‘अमृत कुंभ’

दो मिट्टी के घड़ों को आपस में जोड़ा गया। दोनों घड़ों के बीच एक कैंडल शेप का इलेक्ट्रोड लगाया गया। यह इलेक्ट्रोड चांदी के वर्क और चारकोल से बनाया गया था। यह इलेक्ट्रोड अशुद्धियों को अपनी ओर खींच लेता है। इससे फिल्टर होकर मिलने वाला पानी पूरी तरह सुरक्षित पाया गया।
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नैनो तकनीक से बढ़ेगी क्षमता और सस्ता विकल्प होगा

प्रोजेक्ट में सहयोग कर रहे बायोटेक पार्क के सीईओ डॉ. पीके सेठ ने बताया कि मैटेरियल के उपयोग के लिए आईआईटी मदद करेगा। नैनो तकनीक से बने ‘अमृत कुंभ’ का फायदा यह होगा कि इसका आकार बढ़ जाएगा जिससे पानी साफ  करने की इसकी क्षमता बढ़ जाएगी। दूसरा, यह मौजूदा आरओ और वाटर प्यूरीफायर डिवाइस से काफी सस्ता होगा।

ग्रामीण स्कूलों और गांवों मिल सकेगा पीने का साफ पानी
डॉ. सेठ ने उम्मीद जताई कि अगर सरकार और नाबार्ड जैसी संस्थाएं साथ आगे आईं तो गांवों के स्कूलों और परिवारों को पीने का साफ पानी मिल सकेगा।

छोटी घरेलू डिवाइस बनाने से लेकर बड़े वाटर एटीएम तक इससे बन सकते हैं। बिना बिजली के ही पानी साफ होगा इससे खर्च नहीं आएगा। 20-25 परिवार मिलकर एक वाटर एटीएम लगा सकते हैं। स्कूल और गांवों में ऐसे वाटर एटीएम को आईआईटीआर तकनीकी मदद भी दे सकता है।

आईआईटीआर ने ही पीने के साफ पानी के लिए ओडिशा में बाढ़ के समय बैक्टोकिल नामक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी बनाई थी। बाढ़ के समय बिजली नहीं थी तो सोलर पावर से इस डिवाइस को चलाया गया। इससे स्थानीय लोगों को पानी मिल सका। यह तकनीक अब भी कारगर है।

अमृत कुंभ में नैनो तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। जल्द ही इसे तैयार कर लिया जाएगा।
डॉ. आलोक धवन, निदेशक, आईआईटीआर
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