चुनाव आयोग ने बिजनौर, मुजफ्फरनगर व शामली में तीन व चार अप्रैल को अमित शाह के भाषण को आचार संहिता का उल्लंघन माना है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा ने बताया कि शाह को चुनाव आयोग ने प्रथम दृष्टया दोषी मान लिया है।
शाह को नौ अप्रैल को शाम पांच बजे तक सफाई देने के लिए कहा गया है। अगर शाह पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं तो उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है।
रविवार को शाह के खिलाफ बिजनौर और शामली में आयोग ने दो केस दर्ज कराए थे।
कल शाम पांच बजे तक देना है जवाब
मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा ने बताया कि आचार संहिता उल्लंघन के मामले में नोटिस देने का यूपी में यह पहला मामला है। इसमें शाह को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग ने शाह को नोटिस के साथ उन मीटिंगों की वीडियो रिकॉर्डिंग व न्यूज चैनलों की क्लिपिंग की सीडी भी भेजी है जिन पर शाह को सफाई देनी है।
सिन्हा ने कहा, चुनाव आयोग राजनैतिक दलों के नेताओं से यह अपील करता है कि वे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन न करें।
क्या कहा था अमित शाह ने?
गौरतलब है कि बिजनौर के कान्हा फॉर्म में अमित शाह ने एक समुदाय विशेष के साथ सपा का नाम जोड़ते हुए कहा था कि अगर केंद्र में भाजपा की सरकार आई तो यूपी में मुलायम सरकार दो दिन के भीतर ही गिर जाएगी।
इस बयान पर राजनीतिक पार्टियों ने हंगामा करते हुए शाह की गिरफ्तारी की मांग की थी।
शाह ने जब यह बयान दिया, उस समय उनके साथ मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी विधायक सुरेश राणा भी मौजूद थे।
भाजपा का क्या है कहना
हालांकि भाजपा ने उत्तर प्रदेश के प्रभारी अमित शाह के ऊपर दर्ज की गई एफ.आईआर को सपा सरकार की साजिश बताया है।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि अहिंसक तरीके से अपनी पीड़ा का बदला लेने के लिए ईवीएम बटन दबाने के अलावा और क्या विकल्प है।
वाजपेयी ने आरोप लगाया कि आचार संहिता की धज्जियां उड़ाने वाले आजम खां, शिवपाल यादव, नरेन्द्र भाटी और बसपा के नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मुजफ्फरनगर की पीड़ित जनता से बदला लेने के लिए अहिंसक तरीके से ईवीएम का बटन दबाने के आह्वान में कुछ गलत नहीं है।