अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में देर शाम गज़लों की महफ़िल सती। गजल गायक तलत अजीज ने गजलें पेश कीं। इस मौके पर उन्होंने पंकज उधास को याद किया। मालूम हो कि आज दोपहर में ही पंकज उधास का निधन हो गया। इस मौके पर दो मिनट का मौन रखा गया।
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जिंदगी जब भी तेरी बज्म में लाती है हमें, ये जम़ी चांद से बेहतर नजर आती है हमें से उन्होंने संगीत की महफिल शुरू की। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उन्होंने दूसरी गजल- आज जाने की जिद ना करो...यूं ही पहलू में बैठे रहो सुनाया।
लोगों की डिमांड के बीच उन्होंने रुक कर कहाएक ऐसी गजल पेश कर रहा हूं जो इसी शहर में पैदा हुई। अस्सी के दशक की कहानी सुनाते हुए कहा कि मैं आया था यहां लखनऊ तो गजल लेखक हसन काजमी ( ये सभागार में मौजूद हैं परिचय भी कराया) ने गा के सुनाया था जिसे बाद में मुंबई जा के रिकॉर्ड किया।
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फिर उन्होंने चांद चेहरा हिजाब आंखें हैं, कितनी लाजवाब आंखें हैं, जानलेवा जनाब आंखें हैं। गजल पेश की। इसके बाद पेश हुई कल चौंदहवीं की रात थी गजल पर पूरा हॉल तालियों और वाह-वाह से भर उठा।